एस. पी. सक्सेना/बोकारो। किसी भी पंचायत का विकास और पुरी तरह पंचायती राज कायम हो सके इसीलिए प्रत्येक पांच वर्षों में पंचायत चुनाव होना जरूरी होता है। जिसमे मुखिया, उप मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य पंचायत की जनता से चुन कर आते हैं। सभी चुने गये प्रतिनिधि लगातार पांच वर्षों तक पंचायत के विकास के साथ साथ पंचायत वासियों के समस्याओं को दुर करने मे जुटे रहते हैं, मगर जिस पंचायत मे बीते एक से डेढ़ माह से एक अहम जिम्मेदारी का पद उप मुखिया का पद खाली हो तो कही ना कही पंचायत के विकास कार्यों में बाधा की गुंजाईश रहती है।
बताया जाता है कि बोकारो जिला के हद में गोमिया प्रखंड के कथारा पंचायत मे उप मुखिया के पद पर प्रमोद कुमार विराजमान थे, मगर उनके सीसीएल कर्मी पिता के कैंसर बीमारी से हुई मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर सीसीएल मे उसकी स्थायी नौकरी हो गई। नौकरी प्राप्ति से पूर्व ही उप मुखिया प्रमोद ने अपना त्याग पत्र प्रखंड कार्यालय गोमिया भेज दिया। बावजूद इसके प्रखंड कार्यालय द्वारा नये उप मुखिया चुनाव की प्रक्रिया में विलंब के कारण आज तक यह पंचायत उप मुखिया विहिन बनकर रह गया है।
ज्ञात हो कि, नियमानुसार किसी भी पंचायत में उप मुखिया का चुनाव पंचायत के वार्ड सदस्यों के बीच से हीं किया जाता है। यह पद भी पंचायत के लिए अहम माना जाता है। अन्य पंचायत प्रतिनिधिगण आज भी उप मुखिया चुनाव की नोटिफिकेशन की प्रतिक्षा कर रहे है। देखना बाकी होगा कि प्रखंड कार्यालय की ओर से कब इस चुनावी प्रक्रिया को अमली जामा पहनाया जाता है।
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