पीयूष पांडेय/बड़बील (ओडिशा)। भुवनेश्वर में मेट्रो परियोजना रद्द करने के सरकार का फैसला जनता के साथ विश्वासघात है। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की यह प्रतिक्रिया राज्य की भाजपा सरकार द्वारा दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) के साथ मेट्रो रेल परियोजना का अनुबंध रद्द करने की खबर के कुछ घंटों बाद आई।
सोशल मीडिया पर पुर्व सीएम पटनायक ने कहा कि यह जानकर स्तब्ध हूँ कि भाजपा के नेतृत्व वाली ओडिशा सरकार ने भुवनेश्वर मेट्रो रेल के ठेके रद्द कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि भुवनेश्वर को एक विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित करना हमेशा से हमारा सपना रहा है। हम विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं, निर्बाध आधुनिक परिवहन प्रदान कर रहे हैं और मंदिरों के शहर को विश्वस्तरीय शहर में बदलने के लिए आईटी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहे हैं।
पुर्व सीएम पटनायक ने कहा कि यह परियोजना बस और अन्य कनेक्टिविटी के साथ राज्य की राजधानी के आवागमन के तरीके को बदल देती और शहर के परिवहन को और बेहतर बनाती। उन्होंने कहा कि शहर के अंदर भीड़ भाड़ को कम करने के अलावा, यह शहर के विस्तार के लिए एक बड़ा उत्प्रेरक साबित होता। उन्होंने कहा कि, बेहतर गतिशीलता के लिए मेट्रो प्रणाली की तत्काल आवश्यकता को समझते हुए, हमने परियोजना के पहले चरण के लिए वर्ष 2027 की एक निश्चित समय-सीमा तय की थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमआरसी द्वारा ठेकेदारों को भेजे गए नोटिस से पता चला है कि ओडिशा सरकार ने भुवनेश्वर मेट्रो परियोजना को रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा कि, डबल इंजन वाली सरकार ने मेट्रो रेल जैसी महत्वपूर्ण परियोजना को रद्द कर ओडिशा के तमाम जनमानस के साथ विश्वासघात किया है। यह चौंकाने वाला फैसला शहर को 10 साल पीछे धकेल देगा।
हालांकि, ओडिशा के आवास एवं शहरी विकास मंत्री कृष्ण चंद्र महापात्रा ने कहा कि राज्य सरकार राज्य की राजधानी के लिए एक व्यवहार्य मेट्रो परियोजना की गंभीरता से योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि पिछली बीजद सरकार ने केंद्रीय सहायता नहीं मांगी थी, क्योंकि उसने बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को त्रिसूलिया स्क्वायर से जोड़ने वाली पूरी तरह से राज्य-वित्त पोषित ₹5,000 करोड़ की परियोजना की योजना बनाई थी।
मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार केंद्र की मदद से इस परियोजना को एक संयुक्त उद्यम के रूप में क्रियान्वित करना चाहती है। हम मेट्रो रेल परियोजना को पिछली सरकार की योजना से अलग तरीके से बनाएंगे, जो व्यवहार्य नहीं थी। एक नई डीआरपी तैयार की जाएगी और उसे मंजूरी के लिए केंद्र को भेजा जाएगा।
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