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सलीमा टेटे को अर्जुन पुरस्कार मिलना झारखंडी समाज के लिए गर्व का विषय-विजय शंकर

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की पहली महिला स्टार हॉकी खिलाड़ी एवं भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे को अर्जुन पुरस्कार मिलना झारखंडी समाज के लिए गर्व का विषय है।

उपरोक्त बाते 17 जनवरी को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने झारखंड की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी एवं भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे को अर्जुन पुरस्कार मिलने पर अपनी प्रतिक्रिया में कही।

इन्होंने कहा कि झारखंड के सिमडेगा जिले की मूल रहिवासी सलीमा टेटे मई 2024 से भारतीय महिला हॉकी टीम का नेतृत्व कर रही हैं। अपने पैतृक गांव बड़की छापर से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का उनका सफर लचीलापन और प्रतिभा से भरा रहा है। उनके पिता, सुलक्षण टेटे जो एक पूर्व स्थानीय हॉकी खिलाड़ी थे सफलता की चुनौतीपूर्ण यात्रा में उनका कदम कदम पर साथ दिया जो काबिले तारीफ है।

नायक ने कहा कि सलीमा का हॉकी करियर वर्ष 2010 में शुरू हुआ। जब सिमडेगा जिला हॉकी के अध्यक्ष मनोज कोनबेगी ने एक ग्रामीण स्तरीय टूर्नामेंट के दौरान उनकी प्रतिभा को देखा। शुरुआत में डिफेंडर रहीं सलीमा ने बाद में मिडफील्डर की भूमिका निभाई और कभी-कभी जरूरत पड़ने पर फॉरवर्ड के रूप में खेलकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

वर्ष 2016 में उन्हें जूनियर भारतीय हॉकी महिला टीम के लिए चुना गया, जिसने उनके उल्लेखनीय करियर की नींव रखी थी। इस सम्मान के साथ सलीमा अर्जुन पुरस्कार पाने वाली झारखंड की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बन गई है।
नायक ने कहा कि उनकी यह उपलब्धि हर झारखंडी समाज के लिए गर्व और गौरव का विषय है।

पूरे राज्य के लिए खुशी का क्षण है। उन्होंने कहा की झारखंड की धरती सिर्फ खनीजो से ही भरापुरा नहीं बल्कि इस रत्न गर्भा धरती ने अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को देश को दिया है। अगर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार द्वारा इन गुदड़ी के लाल खिलाड़ियों को सुविधा से लैस कर दिया गया तो यह धरती खेलकूद के मामले मे चीन, जापान, अमेरिका को भी पीछे छोड़ देगा। नायक ने कहा कि सिर्फ यहां के खिलाड़ियों को तराशने के लिए हर जिलों में जौहरी रुपी कोच और साधन उपलब्ध करा दिए जाए।

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