ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में गोमिया प्रखंड के लालबंध में पथ निर्माण विभाग द्वारा लगभग 2 करोड़ 13 लाख 68 हजार रुपये की लागत से पीसीसी पथ एवं नाली निर्माण कार्य कराया जा रहा है। उक्त सड़क निर्माण के दो माह भी नहीं बिता कि सड़क की स्थिति जर्जर हो गई है।
बताया जाता है कि लालबांध में बना सड़क जगह जगह से टूट कर बिखरने लगा है। वहीं उक्त मार्ग से सटे नाली निर्माण कार्य शुरू होते ही ग्रामीणों ने संवेदक पर भारी अनियमितता बरतने का आरोप लगाया है। नाली सड़क लेवल से ऊंचाई पर संवेदक द्वारा कराया जा रहा है। ग्रामीण रहिवासियों के अनुसार सड़क का पानी नाली में तो नहीं जायेगा, परन्तु नाली का पानी सड़क पर जरूर आ जायेगा। कहा जा रहा है कि जिस जगह नाली बनाया गया है, उस जगह नाली का पानी ड्रेन में नहीं बल्कि नाली में हीं है।
ग्रामीणों की चिंता है कि 25 वर्षों के बाद सड़क निर्माण कार्य किया जा रहा और नाली निर्माण भी साथ में हो रहा है, परन्तु निर्माण कार्य में संवेदक और विभागीय अभियंता की मिलीभगत से सड़क का सत्यानाश किया जा रहा है। इसे लेकर 28 अगस्त को बड़ी संख्या में ग्रामीण निर्माण स्थल पर जुटे और कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए। ग्रामीणों का कहना है कि नाली निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग हो रहा है। सरिया की मात्रा कम है और सीमेंट-बालू का अनुपात सही नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना एस्टीमेट के कार्य किया जा रहा है, जिससे कुछ ही दिनों में सड़क टूटने लगी।
इस संबंध में ग्रामीणों ने विभाग के अधिकारियों से जांच की मांग की है। रहिवासियों ने कहा कि यह सड़क गांव की मुख्य सड़क है, जो खेतों के बीच से गुजरती है और बरसात में आवागमन का मुख्य साधन है। अगर गुणवत्ता से समझौता हुआ तो पूरी लागत बर्बाद हो जाएगा। कनीय अभियंता मुकेश कुमार ने कहा कि 6 सदस्यीय निगरानी समिति की देखरेख में कार्य किया जा रहा है। इस बात पर ग्रामीण और भड़क गए तथा जेई से पूछा गया कि कौन है छ सदस्य नाम बताया जाय, परन्तु उन्हें नहीं बताया गया।
लालबंध में 2 करोड़ 13 लाख 68 हजार रुपये की लागत से बन रहे पीसीपी पथ और नाली निर्माण में अनियमितता के आरोप के बाद अब विभाग का पक्ष भी सामने आया है। इस संबंध में फोन पर जब कनीय अभियंता मुकेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के आरोप बेबुनियाद हैं।
गौरतलब है कि 28 अगस्त की सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर घटिया सामग्री के उपयोग का आरोप लगाया था। तस्वीरों में ग्रामीण जेई द्वारा बताई गई निगरानी समिति के साथ निर्माण स्थल पर चर्चा करते दिखे। फिलहाल ग्रामीणों और विभाग के दावों में विरोधाभास बना हुआ है। ग्रामीणों ने निगरानी समिति के सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और जिला प्रशासन से स्वतंत्र जांच की मांग की है। मौके पर गुलाम बारिश अंसारी, इरफान अंसारी, मिथुन चंद्रवंशी, नूर आलम, जाफीर अंसारी, तहसीन अहमद, रहमत अली, इस्राफील अंसारी, बबलू बारिश, मासूम अंसारी, माजूम अंसारी सहित दर्जनों ग्रामीण रहिवासी मौजूद थे।
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