टाटानगर रेल सिविल डिफेंस द्वारा ट्रेनिंग सेंटर में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम
सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। रेलवे ट्रैक पर हाथियों की आवाजाही के दौरान सुरक्षित रेल परिचालन सुनिश्चित करने तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी देने के उद्देश्य से टाटानगर रेल सिविल डिफेंस टीम द्वारा दक्षिण पूर्व रेलवे के इलेक्ट्रिक लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर सभागार में 22 अक्टूबर को एक दिवसीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में चक्रधरपुर, खड़गपुर, रांची और आद्रा रेल मंडल के कुल 286 वरिष्ठ एवं सहायक लोको पायलटों ने भाग लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रशिक्षण के दौरान सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर एवं राष्ट्रपति सम्मानित सदस्य संतोष कुमार ने रेलवे ट्रैक पर हाथियों की आवाजाही के कारणों, हाथियों से सुरक्षा के गोल्डन रूल तथा ट्रैक पर हाथी दिखाई देने की स्थिति में लोको पायलटों द्वारा अपनाई जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दक्षिण पूर्व रेलवे के चारों रेल मंडल हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्र हैं।
कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा और रेल परिचालन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए रेल प्रशासन द्वारा हाथी प्रभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाते हैं तथा निर्धारित क्षेत्रों में गति सीमा संबंधी निर्देश लागू किए गए हैं।
सिविल डिफेन्स संतोष ने बताया कि रेलवे ट्रैक पर हाथियों के आने के कई प्रमुख कारण हैं। कई रेलखंड हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों से होकर गुजरते हैं। भोजन और पानी की तलाश में हाथी अपने पुराने रास्तों पर चलते हुए रेलवे ट्रैक तक पहुंच जाते हैं। इसके अलावा रात में कम दृश्यता तथा जंगल के ऊबड़-खाबड़ रास्तों की तुलना में रेलवे ट्रैक का अपेक्षाकृत समतल होना भी हाथियों को आकर्षित करती है।
उन्होंने लोको पायलटों को समझाया कि ट्रैक पर हाथी दिखाई देने पर निर्धारित परिचालन नियमों और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना, स्थिति के अनुसार गति नियंत्रित करना तथा संबंधित रेल अधिकारियों को तत्काल सूचना देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ यात्रियों और रेलकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी रेल परिचालन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर प्रशिक्षण को डिजिटल एवं पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से संचालित किया गया। सैद्धांतिक प्रशिक्षण के बाद आउटडोर मैदान में मॉक ड्रिल आयोजित कर प्राथमिक उपचार और अग्नि सुरक्षा का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। डेमोस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह ने हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और कार्डियक अरेस्ट के बीच अंतर समझाते हुए सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देने की विधि का प्रदर्शन किया। साथ ही, विभिन्न प्रकार के अग्निशामक यंत्रों के सुरक्षित एवं सही उपयोग की जानकारी दी गई।
वहीं, डेमोस्ट्रेटर अनामिका मंडल ने घायल एवं चोटिल यात्रियों को प्राथमिक उपचार देने तथा बैंडेज करने की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने आपातकालीन परिस्थितियों में घायलों की स्थिति के अनुसार प्राथमिक उपचार करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। प्रशिक्षण कार्यक्रम में दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर, खड़गपुर, रांची और आद्रा मंडल के रिफ्रेशर एवं प्रमोशनल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे वंदे भारत, दुरंतो, राजधानी, सुपरफास्ट, पैसेंजर और मालगाड़ियों का परिचालन करने वाले कुल 286 वरिष्ठ एवं सहायक लोको पायलट शामिल हुए।
कार्यक्रम के अंत में लोको पायलटों ने रेल सिविल डिफेंस टीम द्वारा दिए गए प्रशिक्षण की सराहना की। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य रेल कर्मियों को वन्यजीव सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार और अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाते हुए आपातकालीन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार करना था।
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