राजेंद्र महतो की स्मृति में झारखंड सांस्कृतिक मंच ने कराया आयोजन
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड सांस्कृतिक मंच बोकारो की ओर से 20 सितंबर को झारखंड अलग राज्य आंदोलन के सेनानी एवं झारखंडी संस्कृति के प्रेमी स्वर्गीय राजेंद्र महतो की स्मृति में करम-जावा परब महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम बोकारो जिला के हद में दिपांजली पैलेस आरएम इंटर कॉलेज के निकट चास स्थित अखाड़ा स्थल पर किया गया।
महोत्सव में करम-जावा की पारंपरिक प्रस्तुतियों के साथ झारखंडी संस्कृति, लोकगीत और लोकनृत्य के संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विक्रम महतो ने कहा कि करम-जावा झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और पहचान का अभिन्न हिस्सा है। बदलते दौर में अपनी लोक संस्कृति, रीति-रिवाज, गीत-संगीत और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि स्वर्गीय राजेंद्र महतो ने झारखंडी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए जो प्रयास किए, उन्हें आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में अपनी संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ती है और युवा अपनी जड़ों से जुड़ते हैं।
महोत्सव में करम-जावा टीमों के बीच प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। विभिन्न टीमों ने पारंपरिक गीत और नृत्य की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। प्रतियोगिता के लिए प्रथम पुरस्कार 2500 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 1800 रुपये, तृतीय पुरस्कार 1500 रुपये तथा सांत्वना पुरस्कार के रूप में प्रत्येक जावा टीम को 700 रुपये दी गई।
इस अवसर पर आयोजकों ने कहा कि करम-जावा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि झारखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से वर्ष 1986 से सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। राजेंद्र महतो की स्मृति में आयोजित यह महोत्सव उसी सांस्कृतिक अभियान की निरंतरता है।
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में विजेन्द्र महतो, डॉ नागेश्वर महतो, शांति भारती, अजीत सिन्हा, प्यार हसन प्यारे, परितोष प्रजापति, श्रवण कुमार एवं विशाल कुमार वर्मा शामिल रहे।
आयोजन में राजदेव महतो, विक्रम कुमार महतो, हाबुलाल गोराई, जुबिल अहमद, संतोष कुमार सिंह, करम चांद गोप, संजय लाल महतो, सुदर्शन सिंह, लखन खवास, प्रदीप कुमार महतो, राजकुमार राय, ज्योतिलाल महतो, साधन मंडल, नंदू राज महतो, रघेन्द्र नाथ वर्मा, बनमाली दत्ता, सत्यनारायण मोदक, अमिर शेख, रघुनाथ टुडू, दिनेश नायक, हरिप्रसाद गोप, सागर राजवार, गणेश्वर महतो, परमेश्वर महतो, देवेन राय, गोपाल साहू, दीनबंधु महतो, सुबोध कुमार सिंह, युधिष्ठिर महतो, वीरबल सिंह, श्यामपद महतो, मणीलाल मांझी, सुनील महतो, कौशल्या देवी, कामता सिंह, नीलकंठ महतो, मनिन्द्र महतो, शिव बाउरी, माधव राजवार, रोहित कुमार महतो, कल्याणी सिंह चौधरी, जवाहर लाल सिंह चौधरी, रवि रजवार, संदीप राय, रतन महतो, मनोज नायक, कार्तिक कोड़ा, परमेश्वर हेम्ब्रम, दिगम्बर महतो, फेकनी देवी, टिकू महतो, मनोज कुमार महतो, गणेश दत्ता, बिरंची प्रसाद चौधरी, प्रदीप सिंह, अम्बुज कुमार महथा, अनिल सिंह, बिमल चन्द्र महतो सहित बड़ी संख्या में रहिवासी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में आशीष कुमार, डीके त्रिवेदी और राजकिशोर महतो सहित मंच के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य भी सक्रिय रहे। आयोजकों ने कहा कि झारखंड की पारंपरिक संस्कृति और लोक विरासत को बचाने के लिए भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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