रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड राज्य की सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला के हद में कोड़ाडीह में 20 सितंबर को आयोजित ऐतिहासिक करम महोत्सव में बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड से सैकड़ों की संख्या में कुड़मी समुदाय के गणमान्य शामिल हुए।
पारंपरिक रीति-रिवाज, संस्कृति और करम परब की आस्था से जुड़े इस आयोजन में क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह देखने को मिला। दूर-दराज से पहुंचे कुड़मी समाज के महिला, पुरुषों ने सामूहिक रूप से करम परब मनाते हुए अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत रखा।
इस अवसर पर अर्जुन महतो ने कहा कि करम महोत्सव कुड़मी समाज की पहचान और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ पर्व है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का अवसर मिलता है। कपिलेश्वर महतो ने कहा कि कोड़ाडीह का यह आयोजन समाज के तमाम जनों को एकजुट करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि करम परब आपसी भाईचारे, एकता और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देता है।
वहीं धनंजय महतो ने कहा कि महोत्सव में बड़ी संख्या में रहिवासियों की भागीदारी से यह स्पष्ट है कि समाज अपनी परंपरा और संस्कृति को लेकर जागरूक है। उन्होंने युवाओं से भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। प्रकाश महतो ने कहा कि करम महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक एकता और सामूहिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने आयोजन में शामिल सभी का आभार जताया। करम महोत्सव के दौरान पारंपरिक कार्यक्रमों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनों का ध्यान आकर्षित किया। पूरे आयोजन स्थल पर उत्सव का माहौल रहा और कुड़मी समाज के गणमान्य जनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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