रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के आध्यात्मिक योगदान, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, अध्यात्म और संस्कारों को आगे बढ़ाने वाली अमर चेतना है। उन्होंने 1993 में स्वामी चिन्मयानंद से हुई मुलाकात को याद करते हुए गुरुदेव के स्नेह और आशीर्वाद को भावुक अनुभव बताया।

मोदी ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद युवा शक्ति के विकास और सशक्त भारत के निर्माण के पक्षधर थे। उन्होंने मिशन के युवा स्वयंसेवकों की सराहना की, जिन्होंने 300 दिनों में 40 हजार किलोमीटर की यात्रा कर एक लाख से अधिक युवाओं से संपर्क किया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक विज्ञान, तकनीक, मातृभाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय देश के भविष्य को मजबूत करेगा। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या के राम मंदिर और केदारनाथ-बद्रीनाथ के पुनर्विकास को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया।
उन्होंने युवाओं से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने, समाज में एकता मजबूत करने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि चिन्मय मिशन की आध्यात्मिक विरासत राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
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