एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के लाखों विद्यार्थियों की लंबित छात्रवृत्ति भुगतान करने, कल्याण मंत्री चामरा लिंडा के इस्तीफे की मांग को लेकर आगामी 5 नवंबर को झारखंड की राजधानी रांची स्थित कल्याण विभाग का घेराव किया जायेगा। उक्त बाते ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) के छात्र नेता अफजल दुर्रानी ने 2 नवंबर को कहा।
राजधानी रांची के सीपीआई कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में छात्र नेता अफजल दुर्रानी ने कहा कि झारखंड में शैक्षणिक सत्र 2023–24, 2024–25 एवं 2025–26 की ई-कल्याण छात्रवृत्ति को लेकर छात्र-छात्राएँ गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। विशेष रूप से सत्र 2024–25 की छात्रवृत्ति लगभग दो वर्षों से लंबित है, जबकि सत्र 2025–26 की छात्रवृत्ति का भुगतान भी अब तक नहीं किया गया है। इसके कारण आर्थिक रूप से कमजोर, दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति के भरोसे अपनी शिक्षा जारी रखने वाले विद्यार्थियों के सामने फीस, हॉस्टल, किताबों और अन्य शैक्षणिक खर्चों को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है।
दुर्रानी ने कहा कि छात्रवृत्ति विद्यार्थियों का अधिकार है, सरकार की कोई कृपा या एहसान नहीं। सरकार और कल्याण विभाग की उदासीनता के कारण विद्यार्थियों को अपने ही अधिकार के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। कहा कि आवेदन प्रक्रिया पूरी करने और विभागीय सत्यापन के बावजूद छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं होना व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि सत्र 2024-25 की छात्रवृत्ति के लिए डीएनओ स्तर पर सत्यापन की समय-सीमा पहले 10 मार्च निर्धारित की गई थी, जिसे बढ़ाकर 14 मार्च किया गया था। इसके बावजूद विद्यार्थियों को भुगतान का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं 2 जनवरी को झारखंड गाइड द्वारा साझा रिपोर्ट के अनुसार, सत्र 2024–25 के लगभग 35 प्रतिशत आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए थे। आवेदन रिजेक्ट होने के कारणों को लेकर भी पारदर्शिता और उचित शिकायत निवारण की व्यवस्था जरूरी है।
प्रेस वार्ता में छात्र नेता दुर्रानी ने छात्रवृत्ति से संबंधित अन्य आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वॉइस ऑफ द नेशन की 28 दिसंबर 2024 की रिपोर्ट में लगभग 34 लाख एससी/एसटी/ओबीसी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं मिलने की बात सामने आई थी। वहीं, उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 29,16,018 विद्यार्थियों के 61,480 लाख रुपये की राशि का उल्लेख किया गया है। मिनिस्ट्री ऑफ ट्राइबल अफेयर्स के उपलब्ध आँकड़ों में एसटी वर्ग के 1,29,142 प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति लाभार्थियों का उल्लेख तो है, लेकिन उनके लिए वास्तविक भुगतान राशि (रिलिज्ड फण्ड) का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने का दावा करती है, तो फिर लाभार्थियों तक समय पर राशि क्यों नहीं पहुँच रही है? सरकार को छात्रवृत्ति के लाभार्थियों की संख्या, स्वीकृत राशि, वास्तविक भुगतान और लंबित आवेदनों का पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। साथ ही, रिजेक्ट किए गए आवेदनों की निष्पक्ष समीक्षा कर योग्य विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ सुनिश्चित करना चाहिए।
उन्होंने घोषणा की कि आगामी 5 नवंबर को सुबह 10 बजे राजधानी रांची के करमटोली चौक प्रेस क्लब के पास से छात्र मार्च निकाला जाएगा। यह मार्च कल्याण विभाग, मोरहाबादी पहुँचकर प्रदर्शन एवं विभागीय घेराव में तब्दील होगा। आंदोलन में झारखंड के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के शामिल होने की संभावना है।
प्रेस वार्ता में एआईएसएफ ने राज्य सरकार से माँग की है कि सत्र 2023–24, 2024–25 और 2025–26 की लंबित छात्रवृत्ति का भुगतान अविलंब सुनिश्चित किया जाए। रिजेक्ट किए गए आवेदनों की पुनः समीक्षा की जाए, भुगतान की निश्चित समय-सीमा घोषित की जाए तथा छात्रवृत्ति से संबंधित सभी आँकड़े सार्वजनिक किए जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार विद्यार्थियों की लंबित छात्रवृत्ति का भुगतान सुनिश्चित नहीं करती है, तो कल्याण मंत्री चामरा लिंडा के इस्तीफे की माँग को लेकर आंदोलन और तेज किया जाएगा। प्रेस वार्ता में एआईएसएफ रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन, जिला उपाध्यक्ष जमीर अहमद, जिला सदस्य तेजू मिर्धा एवं सोनू कुमार उपस्थित थे।
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