एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची के लोक भवन पर मजदूर दिवस के मौके पर एक मई को झारखंड दिव्यांग आंदोलन संघ के सदस्यों द्वारा घेराव कर विरोध प्रकट किया गया।
इस अवसर पर झारखंड दिव्यांग आंदोलन संघ द्वारा लोक भवन के समक्ष पर्चा फेंका गया और बताया गया कि लोकतंत्र खतरे में है। कहा गया कि झारखंड दिव्यांग आंदोलन संघ के बैनर तले राज्य के दिव्यांग बीते 634 दिनों से देश का सबसे लम्बा धरना चलाने पर विवश हैं। बावजूद इसके अबतक सरकार के कान में जूँ तक नहीं रेंग रहा है। कहा गया कि सरकार द्वारा राज्य के छात्र, मजदूर, शिक्षक, महिला, जल सहिया, पत्रकार, सबको ठगा जा रहा है। आज महिलाओं को बांटने का काम राज्य सरकार कर रही है।
हर जगह सिर्फ वोट बैंक की राजनीति हावी हो चुकी है। आज झारखंड की महिलाओं को मईया सम्मान योजना के तहत प्रतिमाह ₹2500 देने का कार्य किया जा रहा है। दूसरी ओर दिव्यांग, वृद्धा, विधवा महिलाओं को कमजोर वर्ग समझ कर लुटा जा रहा है। ये सब किया जा रहा है वोट बैंक की राजनीति के लिए।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश चौहान ने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दूसरे राज्य में जाकर वहां के मजदूरों के लिए न्यूतनम मजदूरी देने पर प्रचार करते है, पर आज झारखंड की जल सहिया, रसोइया और कई महिला मजदूरों की न्यूतनम मजदूरी पर चुप्पी क्यों साधे है? जबकि सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम मजदूरी के लिए सभी दल लगातार धरना दे रहें है। आज विडंबना यह है कि पूरे देश में झारखंड के विधायकों की तनख्वाह और ऐशो-आराम सबसे ज्यादा है। इसी कारण हम दिव्यांग समाज चुप-चाप लोक भवन के समक्ष पिछले 634 दिनों से जनता को जगाने की कोशिश कर रहें है।
चौहान ने कहा कि समाज हमें विकलांग और दिव्यांग कहता है। सच में दिव्यांग कौन है? प्रदर्शन कार्यक्रम में झारखंड दिव्यांग आंदोलन संघ के महताब आलम, भगन ठाकुर, सीता सिंह, जिह्वा महतो, शाहनवाज आलम, जानकी एस, साहिल आज़ाद, विजय सिंह, ओम प्रकाश चौहान आदि शामिल थे।
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