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नई श्रम नीति व् निजीकरण के खिलाफ समस्तीपुर में रेल कर्मियों का जन कन्वेंशन

सभी विभागों में 8 घंटे ड्यूटी रोस्टर का पूरी तरह पालन हो-रत्नेश कुमार वर्मा

एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर पूर्व मध्य रेलवे के मान्यता प्राप्त संगठन ईस्ट सेंट्रल रेलवे इम्प्लाइज यूनियन (इसीआरईयू) के बैनर तले 9 अगस्त को समस्तीपुर मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) कार्यालय के समक्ष रेलवे कर्मचारियों का विशाल जन कन्वेंशन आयोजित किया गया। कन्वेंशन में नई श्रम संहिताओं, रेलवे के निजीकरण-निगमीकरण, एनपीएस/यूपीएस, बोनस पर सीलिंग तथा विभिन्न विभागों में आठ घंटे की ड्यूटी व्यवस्था लागू नहीं किए जाने के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता इसीआरईयू मंडल कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश पासवान तथा संचालन मंडल सचिव संजीव मिश्रा ने किया। कन्वेंशन में बड़ी संख्या में रेलकर्मियों ने भाग लिया और केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता यूनियन के केंद्रीय संयुक्त महासचिव सह इंडियन रेलवे इम्प्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय सह महासचिव रत्नेश कुमार वर्मा ने कहा कि नई श्रम नीति, निजीकरण, निगमीकरण, एनपीएस/यूपीएस तथा बोनस सीलिंग जैसे मुद्दों पर सरकार का रवैया कर्मचारी हितों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि रेलवे को टुकड़ों में बांटकर निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की जा रही है, जिसका कर्मचारी संगठित रूप से विरोध करेंगे।

सभा को संबोधित करते हुए मंडल सचिव संजीव मिश्रा ने कहा कि पेंशन, वेतन, भत्ता, बोनस, प्रमोशन, अनुकंपा नियुक्ति, ड्यूटी रोस्टर और विश्राम जैसी सुविधाएं कर्मचारियों का अधिकार हैं, जिन्हें रेलवे प्रशासन को स्वतः लागू करना चाहिए। मंडल कार्यकारी अध्यक्ष कैलाश पासवान ने लेबर कोड की वापसी, पुरानी पेंशन बहाली तथा निजीकरण-निगमीकरण पर रोक लगाने के लिए निर्णायक आंदोलन चलाने का आह्वान किया।

केंद्रीय संगठन सचिव चंदन यादव ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों पर जबरन निजीकरण और निगमीकरण थोपा जा रहा है तथा 55/30 सर्विस रिव्यू जैसी नीतियों से कर्मचारियों में असुरक्षा बढ़ी है। उन्होंने देशभर में सभी रेलवे कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की मांग की। कन्वेंशन को संबोधित करते हुए एआईसीसीटीयू नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि देश के मजदूरों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। ठेका मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल रही है और चार लेबर कोड के माध्यम से श्रमिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।

वक्ताओं ने रेलवे में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति, आउटसोर्सिंग समाप्त करने, समान काम के लिए समान वेतन, सभी विभागों में आठ घंटे का ड्यूटी रोस्टर लागू करने, रन-ओवर दुर्घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच, रेलकर्मियों को जीवन रक्षक यंत्र उपलब्ध कराने, रेलवे अस्पतालों एवं आवासीय सुविधाओं का विस्तार, ट्रांसफर नीति में पारदर्शिता तथा विभिन्न भत्तों के समय पर भुगतान की मांग की।

कन्वेंशन को राजकुमार, प्रेम कुमार ठाकुर, प्रमोद कुमार राय, सोनू कुमार, वीरेंद्र कुमार, दीलीप कुमार, रतन मिश्र, राजीव कुमार, अविनाश कुमार, चंदन कुमार, संतोष मिश्र, कैलाश कुमार, संगम कुमार, राज कुमार, ऐक्टू के ललन कुमार, रेल विकास मंच के राम विनोद पासवान, विश्वनाथ सिंह हजारी, सुशील कुमार, रामलाल राम, पूर्व पार्षद अर्जुन कुमार, दीनबंधु प्रसाद, शाहीद हुसैन, दीपक यदुवंशी सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। कन्वेंशन के अंत में रेल कर्मियों से एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया।

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