संवेदनशील प्रखंडों में दवा, बोट एम्बुलेंस व् फ्लड फाइटिंग सामग्री तैयार रखने का आदेश
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। संभावित बाढ़ और उसके बाद पनपने वाली जल-जनित बीमारियों की रोकथाम तथा राहत एवं बचाव कार्यों की पूर्व तैयारी को लेकर 9 जून को जिला स्तरीय समिति की एक अहम बैठक समाहरणालय सभागार छपरा में आयोजित किया गया। बैठक की अध्यक्षता सारण के जिलाधिकारी (डीएम) वैभव श्रीवास्तव ने की।
बैठक में डीएम वैभव श्रीवास्तव ने जिले के सभी बाढ़ संभावित क्षेत्रों में तैयारियों, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं और तटबंधों की सुरक्षा की बिंदुवार विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया। उन्होंने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि जिले के सभी 17 संभावित बाढ़ प्रभावित प्रखंडों में उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों का तत्काल आकलन कर लें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं और चिकित्सा सामग्रियों का पर्याप्त स्टॉक पहले से ही सुनिश्चित कर लिया जाए।
उन्होंने जिन दवाओं की उपलब्धता के निर्देश दिए उनमें हैलोजन टैबलेट, ब्लीचिंग पाउडर और चूना (लाइम पाउडर), सर्पदंश के इलाज के लिए पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम शामिल है। सभी स्वास्थ्य केंद्रों और भंडारों में उपलब्ध दवाओं का शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन (स्टॉक वेरिफिकेशन) जरूरी बताया गया। इसके अलावा बोट एम्बुलेंस तैयार रहेगी ओर लाइफ जैकेट की खरीदारी भी होगी। आपातकालीन स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं को निर्बाध रखने के लिए बोट एम्बुलेंस की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।
डीएम ने निर्देश दिया कि बोट एम्बुलेंस के संचालन के लिए उपयुक्त रूट और स्थानों का चयन पहले ही कर लिया जाए। साथ ही, इन पर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की प्रतिनियुक्ति समय रहते सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा, राहत कार्यों के लिए आवश्यक संख्या में लाइफ जैकेट की खरीद कर उन्हें संवेदनशील प्रखंडों में भेजने का निर्देश दिया गया।

बैठक में बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि सभी संवेदनशील स्थलों पर जियो बैग, बालू और रस्सी जैसी फ्लड फाइटिंग सामग्रियों का पर्याप्त भंडारण अग्रिम रूप से कर लिया जाए। उन्होंने अभियंताओं को संवेदनशील तटबंधों का नियमित निरीक्षण करने और किसी भी प्रकार के रिसाव या क्षति की सूचना मिलने पर तुरंत मरम्मत कार्य शुरू करने की हिदायत दी।
डीएम ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को बाढ़ के दौरान सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता और जल-जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए पहले से ही मुस्तैद रहने को कहा। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि बाढ़ पूर्व तैयारियों में किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। सभी विभाग आपस में बेहतर समन्वय बनाकर काम करें। उच्च स्तरीय बैठक में उप विकास आयुक्त लक्ष्मण तिवारी, अपर समाहर्ता (विधि-व्यवस्था) प्रमोद कुमार पांडेय, सिविल सर्जन डॉ राजकुमार चौधरी, पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) स्वीटी सिंह, कार्यपालक अभियंता (बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल) और कार्यपालक अभियंता सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारीगण उपस्थित थे।
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