आदिवासी मुलवासी जनाधिकार मंच ने सीएम, डीजीपी से की कार्रवाई की मांग
एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची के भवन प्रमंडल भवन निर्माण विभाग रांची टू के सहायक अभियंता सह प्राक्कलन पदाधिकारी रमेश टुडू ने दो ठेकेदार के खिलाफ मारपीट और गाली गलौज करने से संबंधित मामला लालपुर थाना में दर्ज कराया है। जिसमें ठेकेदार राणा रणजीत सिंह तथा राणा संतोष कुमार सिंह पर मारपीट करने, भद्दी गाली देने तथा जातिसूचक शब्द का प्रयोग करने का आरोप लगाया गया है।
सहायक अभियंता टुडू के साथ घटित घटना के विरोध में आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच ने मोर्चा खोल दिया है। इसे लेकर मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने झारखंड के मुख्यमंत्री, डीजीपी तथा रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने 18 मई को कहा कि भवन प्रमंडल संख्या–2, रांची में कार्यरत प्राक्कलन पदाधिकारी रमेश टुडू के साथ कार्यालय अवधि में हुई मारपीट, जातिसूचक गाली-गलौज एवं सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने की घटना बर्दाश्त नही किया जायेगा। कहा कि प्राक्कलन पदाधिकारी टुडू के साथ कथित मारपीट, जातिसूचक गाली-गलौज और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
इस घटना को लेकर आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर तत्काल कार्रवाई का दबाव बनाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री (सीएम), पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को संयुक्त पत्र भेजकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की मांग की है।
नायक ने कहा की बीते 16 मई को कार्यालय में घुसकर उपरोक्त दो संवेदको द्वारा सरकारी सहायक अभियंता टुडू पर अनावश्यक कार्यो के लिए दबाव बनाया और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई तथा जातिसूचक अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। इतना ही नहीं, सरकारी दस्तावेजों को भी नुकसान पहुंचाने तथा जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। यह घटना केवल एक सरकारी अधिकारी पर हमला नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान, कानून व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला है।
नायक ने कहा कि झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में यदि सरकारी कार्यालयों के अंदर आदिवासी अधिकारियों को जातिसूचक गालियां देकर पीटा जाएगा, तो यह बेहद गंभीर और शर्मनाक स्थिति है। आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच मांग करता है कि आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी की जाए। एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपियों पर कठोर कार्रवाई हो। सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट और धमकी के आरोप में गैर-जमानती धाराएं लगाई जाएं। पीड़ित अधिकारी एवं गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। राज्य सरकार इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए।
उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच पूरे राज्य में आंदोलन करने को बाध्य होगा। अब आदिवासी समाज अपमान और उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं करेगा। कहा कि झारखंड की धरती पर संविधान और कानून से ऊपर कोई नहीं है।
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