रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास को लेकर कटिबद्ध दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो अपने शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ-साथ अपने समस्त कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक कल्याण के प्रति भी अत्यंत संवेदनशील है।
इसी प्रतिबद्धता के साथ 4 मई को विद्यालय परिसर में प्रशासनिक सदस्यों और सहयोगी सदस्यों के लिए दो अलग-अलग सत्रों में विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। यहां प्रशासनिक सदस्यों के लिए आयोजित सत्र में विद्यालय के काउंसेलर लाल शुभेन्द्र नाथ शाहदेव ने तनाव-प्रबंधन के व्यावहारिक गुर सिखाए। उन्होंने मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से तनाव को नियंत्रित करने के टिप्स देते हुए इसके प्रमुख कारकों, जैसे- परिस्थितिजन्य दबाव, आनुवांशिकी कारण, अकेलापन आदि पर विस्तार से प्रकाश डाला।
काउंसेलर शाहदेव ने तनाव के लक्षणों को पहचानने और समय रहते उनमें सुधार के लिए जीवन शैली में बदलाव लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शारीरिक कसरत, मोबाइल की लत कम करने, पर्याप्त नींद, योग-ध्यान, संतुलित आहार और मानसिक एकाकीपन दूर करने के लिए अच्छी किताबें पढ़ने व हॉबीज विकसित करने की महत्ता बताई। सत्र के दौरान कर्मियों को डीप ब्रीदिंग (गहरी सांस लेने) का अभ्यास भी कराया गया।
इसके पूर्व, सपोर्टिंग स्टाफ के लिए बच्चों की देखभाल विषय पर केंद्रित एक सत्र आयोजित किया गया। इसमें काउंसलर शाहदेव ने बाल यौन उत्पीड़न जैसी गंभीर समस्याओं से बचाव के लिए पोक्सो एक्ट के विभिन्न कानूनी और सामाजिक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कर्मियों को जागरूक किया कि कैसे वे अपने बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान कर सकते हैं और संकट की स्थिति में सजग रहकर उनकी रक्षा कर सकते हैं।
विद्यालय के प्राचार्य डॉ ए. एस. गंगवार ने तनावमुक्त कार्यस्थल को किसी भी संस्थान की उन्नति का मुख्य आधार बताया। उक्त विषयों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने अपने कर्मियों के प्रति विद्यालय की तत्परता को दोहराया। कहा कि संस्थान की प्रगति में प्रशासनिक और सहयोगी स्टाफ की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है। कहा कि आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य जरूरत है। बच्चों की सुरक्षा और कर्मियों का मानसिक स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
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