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भारतीय इतिहास व् सामाजिक विमर्श: हरिहरनाथ मंदिर में शूद्रों का सच पुस्तक पर संगोष्ठी

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर के ऐतिहासिक हरिहरनाथ मंदिर सभागार में 25 अक्टूबर को मुकुंद राव शोध संस्थान (सबलपुर) के तत्वावधान में चर्चित लेखक मिथिलेश कुमार सिंह की बहुचर्चित पुस्तक शूद्रों का सच पर राष्ट्रीय विमर्श कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में भारतीय समाज, वर्ण व्यवस्था, जाति संरचना और इतिहास के अनछुए पहलुओं पर गहन और सार्थक बौद्धिक संवाद साझा की गयी।

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता पूर्व विधायक परमानंद ऋषिदेव ने की, जबकि धर्म जागरण समन्वय (उत्तर-पूर्व) के क्षेत्र प्रमुख सुबेदारजी ने सारगर्भित विषय-प्रवेश कराया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. अजीत कुमार ने तथा धन्यवाद ज्ञापन मुकुंद राव शोध संस्थान के उपनिदेशक डॉ आशुतोष कुमार ने किया।

समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख स्वांत रंजन ने कहा कि यह पुस्तक इतिहास के उन वर्जित पन्नों को सामने लाती है, जिन्हें षड्यंत्र के तहत दबाया गया था। मुख्य वक्ता का स्वागत सांसद प्रतिनिधि राकेश कुमार सिंह (राकेश सिंह) ने अंगवस्त्र एवं मोमेंटो भेंटकर किया।

मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री डॉ राजभूषण चौधरी ने कहा कि समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होने में यह पुस्तक मील का पत्थर साबित होगी। अतिविशिष्ट अतिथि बिहार विधान परिषद के उपनेता प्रो. (डॉ) राजेंद्र प्रसाद गुप्ता और प्रसिद्ध वक्ता तुफैल चतुर्वेदी ने इसे भारतीय इतिहास-बोध को नया आयाम देने वाली कृति बताया। विशिष्ट अतिथि बिहार संस्कृत विकास परिषद के अध्यक्ष विनोद सम्राट ने इसे इतिहास के पुनर्परीक्षण का गंभीर बौद्धिक प्रयास कहा।

इस अवसर पर स्व. पायलट बाबा की शिष्या साध्वी लक्ष्मी माता ने समाज को कमजोर करने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। लेखक मिथिलेश कुमार सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि उनकी पिछली चर्चित पुस्तक अंबेडकर, इस्लाम और वामपंथ की तरह यह कृति भी इतिहास के मौन सत्यों को मुखर आवाज देती है।

इस राष्ट्रीय आयोजन में विधान पार्षद जीवन कुमार, लालगंज विधायक संजय कुमार सिंह, डॉ आशुतोष, मंदिर न्यास समिति के सचिव विजय कुमार सिंह ‘लल्ला’, राजेश कुमार हिंदू, अभिषेक श्रीवास्तव, विद्यार्थी परिषद के प्रांत सह-मंत्री यशवंत कुमार, मनीष कुमार, मिलन कुमार, संजीव सिंह, मुकेश सिंह बबलू, शशि आनंद और वरुण कुमार सहित इतिहास, साहित्य तथा सामाजिक अध्ययन से जुड़े अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

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