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आपदा में मानवता की मिसाल: एक हजार बाढ़ पीड़ितों को मिला सूखा राशन

सबलपुर दियारा में अनिल गौतम बने सहारा, बाढ़ पीड़ितों में बांटा राहत किट

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन अपने पीछे तबाही के गहरे निशान छोड़ता जा रहा है। इस बार की बाढ़ की विभीषिका से सारण जिला के हद में सोनपुर अंचल का पूरा सबलपुर दियारा त्रस्त है। यहां के चारों पंचायतों के टोले, मोहल्ले और पट्टियां जलमग्न हैं।

ध्यान देने योग्य है कि जिला प्रशासन के लाख दावों के बावजूद राहत सामग्री का वितरण ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। ऐसी विषम परिस्थिति में कई सामाजिक संगठन, निजी एजेंसियां और जनप्रतिनिधि अपने स्तर से आगे आकर पीड़ितों की मदद कर रहे हैं। इसी कड़ी में सबलपुर बभनटोली रहिवासी और सरयुग गौतम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अनिल सिंह गौतम बाढ़ पीड़ितों के लिए आशा की किरण बनकर उभरे हैं।

जानकारी के अनुसार सरयुग गौतम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के सौजन्य से 8 सितंबर को सबलपुर के लगभग एक हजार बाढ़ पीड़ित परिवारों के बीच एक सप्ताह का सूखा राशन वितरित किया गया। यह राहत अभियान लोक सेवा आश्रम के संत शिरोमणि विष्णुदास उदासीन उर्फ मौनी बाबा की उपस्थिति एवं दिशा-निर्देश में चलाया गया।

अभियान के तहत अनिल सिंह गौतम के पैतृक आवास सबलपुर बभनटोली पर कुम्हार टोली, दुसाध टोली, कचहरी बाजार, मुस्लिम टोली, चर्मकार बस्ती, हज्जाम टोली, लोहार टोली और कानू टोली सहित विभिन्न टोलों के बाढ़ पीड़ित परिवारों को राहत किट दी गई। किट में चावल, दाल, सत्तू, सोयाबीन, सरसों तेल, नमक के साथ-साथ मोमबत्ती, माचिस और मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती जैसी दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री शामिल थी। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए छूटे हुए रहिवासियों के घर -घर जाकर राहत सामग्री वितरण किया जा रहा है।

इस अवसर पर सोनपुर आर्य समाज के प्रमुख शर्मानंद सिंह, सबलपुर मध्यवर्ती पंचायत के पूर्व मुखिया दीपक शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता अविनाश कुमार, विश्वनाथ सिंह, अधिवक्ता अभय कुमार सिंह, अधिवक्ता ए. के. शर्मा, धर्मनाथ महतो, श्याम किशोर शर्मा, सत्तन शर्मा, अरविंद शर्मा, अजित कुमार, किसलय शर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और बाढ़ पीड़ित मौजूद रहे।

इस अवसर पर भेंट में कंपनी के निदेशक अनिल सिंह गौतम ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा को देखते हुए इसे केवल सामाजिक दायित्व ही नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी मानकर यह प्रयास किया गया है। कहा कि भविष्य में भी हरसंभव सहायता जारी रखी जाएगी। स्थानीय ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जब परिवार भोजन और रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे समय में यह मदद न केवल राहत है, बल्कि समाज के सक्षम वर्गो के लिए एक प्रेरणा भी है।

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