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हरिमंदिर खैराचातर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भक्ति और आस्था में डूबे श्रद्धालु

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड के मेन रोड खैराचातर स्थित हरिमंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर को पूरे उत्साह, श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ धूमधाम से मनाया गया।

ज्ञात हो कि, जन्माष्टमी को लेकर सुबह से ही मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया था। शाम होते-होते बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिमंदिर पहुंचने लगे, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

जन्माष्टमी के अवसर पर खैराचातर स्थित हरिमंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से मंदिर की सजावट की गई थी। भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक झांकी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन और धार्मिक गीतों से वातावरण कृष्णमय बना रहा। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन होकर जयकारे लगाते नजर आए। जय श्रीकृष्ण और नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयघोष से हरिमंदिर परिसर गूंज उठा।

मध्यरात्रि में हुआ भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव

ज्ञात हो कि, बीते 3-4 सितंबर की मध्य रात्रि में जैसे-जैसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय नजदीक आया, श्रद्धालुओं में उत्साह और बढ़ता गया। मध्य रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण का विधिवत पूजन एवं आरती की। इसके बाद प्रसाद का वितरण किया गया। आयोजन में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हुए। बच्चों में भी जन्माष्टमी को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। कई बच्चे श्रीकृष्ण और राधा के वेश में मंदिर पहुंचे, जिससे आयोजन की भव्यता और बढ़ गई।

आयोजकों ने बताया कि जन्माष्टमी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम, कर्म, सत्य और धर्म के संदेश को जीवन में उतारने का अवसर भी है। श्रद्धालुओं से भगवान श्रीकृष्ण के बताए मार्ग पर चलने और समाज में प्रेम, भाईचारा एवं सद्भाव बनाए रखने की अपील की गई। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। पूजा-अर्चना एवं धार्मिक कार्यक्रमों के सफल आयोजन में मंदिर समिति के सदस्यों, स्थानीय रहिवासियों एवं श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। धूमधाम और भक्तिमय माहौल के बीच श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न हो गया।

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