श्रीकृष्ण प्रकटोत्सव व् दिव्य संदेश स्मरण का पवित्र त्योहार जन्माष्टमी-पुजारी
प्रहरी संवाददाता/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। झारखंड की राजधानी रांची के पुन्दाग स्थित मंदिर में 5 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी श्रद्धा और उत्साह के साथ धूमधाम से मनाई गई।
इस अवसर पर बीते 4-5 सितंबर की मध्य रात्रि 12 बजे शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। श्रद्धालू महिलाओं ने उपवास रखकर रात 12 बजे तक राधा-कृष्ण की प्रतिमा के समक्ष बैठकर भजन-कीर्तन किया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए। लगभग 2500 श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्णा के समक्ष माथा टेककर आशीर्वाद मांगा।
इस अवसर पर बाहर से आए श्रीकृष्ण प्रेमी गायक ने दो दर्जन भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी, जिस पर देर रात तक भक्तगं उछलते, नाचते, गाते एवं जयकारे लगाते रहे। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा। पुंदाग स्थित राधे कृष्ण मंदिर के पुजारी अरविन्द कुमार एवं भगवान श्रीकृष्ण भक्त राजू अग्रवाल के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
मंदिर के पुजारी अरविन्द ने कहा कि जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के प्रकटोत्सव और उनके दिव्य संदेश का स्मरण करने का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है। कृष्ण भक्त राजू अग्रवाल ने बताया कि पुंदाग स्थित श्रीराधा कृष्ण मंदिर झारखंड राज्य मे सबसे बड़ा तथा पूरे भारत में तीसरे स्थान पर आने वाला लोकप्रिय मंदिर है। कहा कि मंदिर में कांच (मिरर) की अद्भुत कारीगरी विशेष आकर्षण का केन्द्र है।
बताया जाता है कि पुंदाग के श्रीराधा कृष्ण मंदिर (श्रीकृष्ण प्रणामी सेवा धाम) झारखंड का सबसे बड़ा राधा कृष्ण मंदिर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी चर्चे मे रहा। यह पुंदाग टीओपी और कटहल मोड़ के समीप स्थित है। मंदिर परिसर 4,000 वर्ग फुट में फैला है। मंदिर में कांच (मिरर) की अद्भुत कारीगरी की गई है। इसके सजावटी तत्व ग्लास फाइबर रीइन्फोर्सड कंक्रीट से बने हैं। खूबसूरत मिरर वर्क वाला सत्संग हॉल है। मंदिर के फर्स्ट फ्लोर पर बाहरी दर्शनार्थियों के लिए 18 कमरे और भोजन क्षेत्र निर्मित है।
जबकि सेकंड फ्लोर दिव्यांगजनों और वंचितों के लिए मेडिकल केयर सेंटर का निर्माण किया गया है। यह स्थान केवल पूजा-अर्चना का केंद्र ही नहीं, बल्कि एक सामुदायिक और सेवा केंद्र भी है। इसका उद्घाटन संत शिरोमणि डॉ सदानंद स्वामी महाराज ने 20 संत-महात्माओं के साथ प्राण प्रतिष्ठा कर की है। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मंदिर की सुन्दरता एवं नक्काशी मन मोहक रहा।
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