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राज्य के 23,389 शिक्षकों के यात्रा भत्ते पर भुगतान को ले शिक्षक संघ ने मांगा हिसाब

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड में कक्षा 9 से 12 तक के शिक्षकों के लिए तीन दिवसीय (20 घंटे) आवासीय सीपीडी प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण को लेकर झारखंड प्लस टू शिक्षक संघ ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए विभाग की व्यवस्था का स्वागत किया है, लेकिन पिछले वर्ष प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों के लंबित यात्रा भत्ता (टीए) का अब तक भुगतान नहीं होने पर कड़ी नाराजगी जताई है।

संघ के प्रांतीय अध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद ठाकुर ने 4 सितंबर को कहा कि शिक्षक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सतत प्रशिक्षण का महत्व समझते हैं और विभागीय प्रशिक्षण में पूरी जिम्मेदारी के साथ शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि समस्या प्रशिक्षण से नहीं, बल्कि प्रशिक्षण के लिए आने-जाने पर होने वाले खर्च के भुगतान में हो रही देरी से है।

संघ के अनुसार वर्ष 2026 में कक्षा 9 से 12 तक के राज्य के 23,389 शिक्षकों को सीपीडी प्रशिक्षण में भाग लेना है। यदि प्रति शिक्षक औसतन 400 रुपये यात्रा भत्ता माना जाए, तो कुल राशि 93,55,600 रुपये यानी करीब 93.56 लाख रुपये होती है। संघ ने सवाल उठाया है कि जब शिक्षकों को प्रशिक्षण केंद्र तक पहुंचने के लिए यात्रा करनी है और विभागीय निर्देश में सार्वजनिक वाहन के अनुमन्य यात्रा भत्ता का प्रावधान भी किया गया है, तो शिक्षकों को वास्तविक भुगतान कब और कैसे सुनिश्चित किया जाएगा?

ठाकुर ने कहा कि संबंधित डायट को राज्य स्तर से राशि उपलब्ध कराने की बात कही गई है, लेकिन पिछले वर्ष प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों का यात्रा भत्ता अब तक लंबित रहना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि राशि का प्रावधान और आवंटन किया जाता है, लेकिन शिक्षकों को भुगतान नहीं मिलता, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि राशि किस स्तर पर लंबित है और उसका भुगतान क्यों नहीं हुआ।

संघ अध्यक्ष का कहना है कि शिक्षक अपने नियमित शैक्षणिक दायित्वों के साथ विभागीय प्रशिक्षण में भाग लेते हैं। कई शिक्षकों को निर्धारित प्रशिक्षण केंद्र तक पहुंचने के लिए अपने वेतन से यात्रा खर्च करना पड़ता है। पिछले वर्ष का यात्रा भत्ता लंबित रहने के कारण नए प्रशिक्षण में शामिल होने वाले शिक्षकों के बीच स्वाभाविक रूप से चिंता उत्पन्न हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक प्रशिक्षण का विरोध नहीं कर रहे हैं। बल्कि उनका मानना है कि शिक्षकों के ज्ञान एवं कौशल को बेहतर बनाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण आवश्यक हैं। संघ की मांग है कि प्रशिक्षण के साथ उससे जुड़ी वित्तीय देनदारियों का भुगतान भी पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से किया जाए।

झारखंड प्लस टू शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि पिछले वर्ष के लंबित यात्रा भत्ते का तत्काल भुगतान किया जाए। साथ ही वर्ष 2026 के सीपीडी प्रशिक्षण में भाग लेने वाले शिक्षकों के यात्रा भत्ते के लिए राशि उपलब्ध कराने के बाद वास्तविक भुगतान की भी निगरानी की जाए। कहा कि यदि विभाग शिक्षकों से समय पर प्रशिक्षण में पहुंचने की अपेक्षा करता है, तो विभाग को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शिक्षकों को प्रशिक्षण से संबंधित अनुमन्य राशि के लिए महीनों इंतजार न करना पड़े।

 

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