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या देवी सर्वभूतेषु शक्ति की आराधना से गूंजा पूरा सोनपुर अनुमंडल क्षेत्र

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर के पावन शुभारंभ के एक दिन पूर्व 10 अक्टूबर से ही सारण जिला के हद में अवस्थित सम्पूर्ण सोनपुर अनुमंडल क्षेत्र भक्ति के महासागर में डूब गया है। यहां के सुप्रसिद्ध शक्ति मंदिरों में मां दुर्गा और उनके विविध स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना का दौर आरंभ हो चुका है।

जानकारी के अनुसार प्रातःकाल से ही यहां के मंदिरों और घर-आंगनों में माँ दुर्गा सप्तशती के पवित्र पाठ से संपूर्ण वातावरण पूरी तरह गुंजायमान है। सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥
क्षेत्र के तमाम मंदिरों की साफ-सफाई और आकर्षक साज-सज्जा का कार्य पर्व के आरंभ से एक दिन पूर्व पूरी तरह से पूर्ण कर लिया गया। नवरात्र की पूर्व संध्या पर देवी मंदिरों में आरती में भक्ति भाव से श्रद्धालु जुटे रहे। इससे पूर्व अहले सुबह से ही स्नान-ध्यान कर पवित्र मन से मंदिरों में माथा टेकते श्रद्धालु दिखे।

इस वर्ष पारंपरिक पूजा-पाठ के साथ-साथ अनुमंडल के सभी धार्मिक स्थलों पर पवित्रता और सात्विकता पर विशेष बल दिया जा रहा है। सोनपुर की अधिष्ठात्री दक्षिण मुखी काली माई से लेकर आमी की अम्बिका भवानी, दिघवारा की महिषासुरमर्दिनी, शीतलपुर की मनाइन माई और नयागांव के कालरात्रि स्थान तक भक्तों का अनवरत तांता लगा है।
सोनपुर काली घाट जहां साक्षात विराजती हैं माँ दक्षिणा काली। नारायणी (गंडकी) नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित सोनपुर का यह प्रसिद्ध देवी स्थल देश-विदेश में अपनी विशिष्टता के लिए जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यहां साक्षात कोलकाता की दक्षिणेश्वरी काली के स्वरूप में मां विराजमान हैं।

बंगला आर्ट के अद्भुत नमूने वाले मंदिर के गर्भगृह में दक्षिणमुखी काली की दिव्य प्रतिमा स्थापित है। विशेषता है कि महाकाल शिव उनके चरणों के नीचे शव स्वरूप में लेटे हैं, जो यह संकेत देते हैं कि महाकाल की भी शक्ति महाकाली ही हैं। कालिका परमा विद्या, महाकाल-स्वरूपिणी। मंदिर के निकट स्थित आप रूपी गौरी-शंकर मंदिर में उमा-महेश्वर की मनोहारी मूर्ति और गरुड़ पर सवार भगवान विष्णु की प्रतिमा के साथ-साथ हाथ में शिवलिंग धारण किए चतुर्मुखी काली की दुर्लभ मूर्ति भी भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। वहीं, बाबा हरिहरनाथ मंदिर के पश्चिम में गंडकी नदी के तट पर स्थित बाबा बालकनाथ की गुफाओं में शिवलिंग पर उभरी अद्भुत देवी मुखाकृति शक्ति-साधकों को मंत्रमुग्ध कर रही है।

प्रखंड के हद में नयागांव (डुमरी बुजुर्ग) में माता के सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि की विशेष पूजा-अर्चना चल रही है। एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता… के मंत्रोच्चार के साथ भक्त मां के इस भयंकर किंतु कल्याणकारी स्वरूप की आराधना में लीन हैं। थोड़ा आगे बढ़ने पर शीतलपुर में पीरगंज-दरियापुर पथ पर स्थित मनाइन माई अपने भक्तों को सभी प्रकार की व्याधियों और संकटों से मुक्त करने वाली देवी के रूप में पूजी जाती हैं। यहां भी दुर्गा सप्तशती का निरंतर पाठ चल रहा है। दिघवारा (नकटी देवी) में गंगा नदी के किनारे स्थित महिषासुरमर्दिनी दुर्गा माता की यह प्रतिमा नकटी देवी के नाम से लोक प्रसिद्ध है। रोगानशेषानपहंसि तुष्टा… के पाठ से पूरा परिसर गूंज रहा है। प्रसिद्ध सिद्ध शक्ति स्थल आमी में अम्बिका शक्ति पीठ पर भक्तों का सैलाब उमड़ा हुआ है।

भक्ति और उल्लास का संदेश हर ओर देवी की स्तुति और भक्ति गीतों से पूरा सोनपुर अनुमंडल क्षेत्र सराबोर है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में नवरात्र को लेकर गजब का उत्साह है। संपूर्ण क्षेत्र में इस समय बस एक ही गूंज सुनाई दे रही है शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते।

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