एस. पी. सक्सेना/बोकारो। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 10 अक्टूबर को बोकारो जिले में संचालित जागरूकता पखवाड़े का समापन सिविल सर्जन डॉ अभय भूषण प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ किया गया।
इस अवसर पर योग प्रशिक्षकों एवं नोडल सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारियों (नोडल सीएचओ) को योगा फॉर मेन्टल हेल्थ (मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग) विषय पर प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य योग के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा तनाव, चिंता और मानसिक परेशानियों से निपटने के लिए आमजनों को प्रोत्साहित करना था।
इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ अभय भूषण प्रसाद ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन एवं मानसिक विकारों की रोकथाम के लिए योग, प्राणायाम और तनाव प्रबंधन को स्वास्थ्य सेवाओं का अभिन्न अंग बनाना आवश्यक है। कहा कि नियमित योगाभ्यास तनाव नियंत्रण, भावनात्मक संतुलन तथा बेहतर नींद में सहायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की प्रारंभिक पहचान, समयबद्ध परामर्श एवं समुचित उपचार सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके लिए योग प्रशिक्षकों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

उन्होंने सभी प्रशिक्षित कर्मियों से अपील की कि वे समुदाय स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाएं, मानसिक रोगों से जुड़ी भ्रांतियों एवं सामाजिक कलंक को दूर करने में सहयोग करें तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित को उचित चिकित्सा सेवाओं से जोड़ें। सदर अस्पताल बोकारो के मनोरोग चिकित्सक डॉ प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में योग एवं प्राणायाम की महत्वपूर्ण सहायक भूमिका है।
नियमित योगाभ्यास से तनाव प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने, स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के संतुलन तथा भावनात्मक स्थिरता को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि योग एवं ध्यान जैसी तकनीकें एंग्जायटी (चिंता), तनाव और नींद संबंधी समस्याओं के प्रबंधन में सहायक पूरक उपाय हो सकती हैं। हालांकि, अवसाद एवं अन्य मानसिक विकारों की स्थिति में योग को निर्धारित मनोचिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं, बल्कि उसके पूरक के रूप में अपनाना चाहिए।
उन्होंने योग प्रशिक्षकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से अपील की कि वे नियमित योगाभ्यास के प्रति आमजनों को जागरूक करें तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने के लिए प्रेरित करें। इस अवसर पर जिला परामर्शी, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) बोकारो मोहम्मद असलम ने तंबाकू सेवन और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंधों पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि तंबाकू और निकोटीन की लत इंसान के स्वास्थ्य एवं जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। तनाव दूर करने के लिए तंबाकू का सहारा लेने के बजाय स्वस्थ जीवनशैली, योग और सकारात्मक गतिविधियों को अपनाना चाहिए। उन्होंने आमजनों से तंबाकू सेवन से दूर रहने तथा इसकी लत से छुटकारा पाने के लिए जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता लेने की अपील की।
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