रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। जल बचाओ-जीवन बचाओ अभियान के तहत विश्व जल दिवस के अवसर पर 22 मार्च की संध्या 5 बजे बोकारो की जीवन रेखा मानी जाने वाली गरगा नदी को प्रदूषण से बचाने की मांग को लेकर चास स्थित गरगा नदी तट पर स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान द्वारा गरगा को जीने दो कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
बताया जाता है कि आयोजित गरगा को जीने दो कार्यक्रम में वक्ताओं ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चास नगर निगम एवं बोकारो इस्पात नगर की आवासीय कॉलोनियों से निकलने वाले गंदे नालों का लगातार नदी में गिरना गरगा नदी के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। स्थिति यह है कि नदी का जल अत्यंत प्रदूषित हो गया है और उससे दुर्गंध आने लगी है, जिससे आसपास के रहिवासियों का जीवन भी प्रभावित हो रहा है।
ज्ञात हो कि स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान द्वारा पिछले कई वर्षों से गरगा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए आंदोलन चलाया जा रहा है। इस संबंध में जिला प्रशासन, चास नगर निगम, राज्य सरकार, बोकारो इस्पात संयंत्र एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कई बार लिखित आवेदन देकर और अधिकारियों से मिलकर ठोस कदम उठाने की मांग की गई है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।
इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि जल ही जीवन है और इसे प्रदूषित करना न केवल नैतिक अपराध है, बल्कि कानूनन भी दंडनीय है। बावजूद इसके सरकारी तंत्र की लापरवाही से नदी की हालत बद से बदतर होती जा रही है।
कार्यक्रम की शुरुआत गरगा नदी के विधिवत पूजन से की गई। इसके बाद उपस्थित पर्यावरण प्रहरियों ने सामूहिक संकल्प लिया कि जब तक गरगा नदी को पूर्ण रूप से प्रदूषण मुक्त नहीं किया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा। संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ ने कहा कि गरगा नदी का पौराणिक नाम गर्ग गंगा है, जिसे गर्ग ऋषि ने अपने तपोबल से उत्पन्न किया था।
उन्होंने बताया कि इस नदी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से भी जोड़ा जाता है, इसलिए इस क्षेत्र में इसका स्थान गंगा के समान है। ऐसे पवित्र नदी को प्रदूषित करना अत्यंत घृणित और गंभीर अपराध है। इस अवसर पर रघुवर प्रसाद, शशि भूषण ओझा मुकुल, मृणाल चौबे, ललित कुमार, वीरेंद्र चौबे, विष्णु शंकर मिश्र, धर्मेंद्र कुमार, विजय त्रिपाठी, अक्षय दुबे, प्रो. गणेश सिंह, आर.एल. द्विवेदी, अर्जुन पांडेय, प्रवीण ओझा सहित अनेक पर्यावरण प्रहरी उपस्थित थे।
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