ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। नालसा, झालसा एवं प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश – सह – अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार बोकारो प्रदीप कुमार श्रीवास्तव के निर्देशानुसार 20 मार्च को तेनुघाट उपकारा में ऑनलाइन जेल अदालत सह विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Vedio conferencing) के द्वारा व्यवहार न्यायालय तेनुघाट से किया गया।
उक्त जेल अदालत में वादों के निष्पादन के लिए एक भी आवेदन (Application) नही दिया गया था, इसलिए एक भी मामलों का निष्पादन नहीं हो सका।
जानकारी के अनुसार तेनुघाट जेल में आयोजित इस ऑनलाइन या आभासी जेल अदालत में वादों के निष्पादन हेतु एक बेंच का गठन किया गया था। जिसके सदस्य व्यवहार न्यायालय के एसडीजेएम दीपक कुमार साहू और अधिवक्ता रीतेश कुमार जयसवाल मौजूद थे।
उक्त जेल अदालत में वादों के निष्पादन के लिए एक भी आवेदन नही दिया गया था। इसलिए एक भी मामलों का निष्पादन नहीं हुआ। साथ ही तेनुघाट जेल में एक आभासी या ऑनलाइन विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन व्यवहार न्यायालय तेनुघाट से वीडियो कॉन्फ्रंसिंग के माध्यम से किया गया।
इस जागरूकता कार्यक्रम में तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के एसडीजेएम दीपक कुमार साहू के द्वारा तेनुघाट जेल के बंदियो को दहेज उत्पीड़न एवं मोटरयान दुर्घटना के बारे में जानकारियां दी गई। इस अवसर पर बंदियों को बताया गया कि आप अपने को सुधार कर जेल से बाहर निकले, ताकि बाहर निकालने के बाद आप दूसरों को गलत काम करने से रोके।
उन्होंने बंदियों के जेल में मिलने वाले सुविधाओं के बारे में जानकारियां दी। उन्हें बताया कि जेल से निकलकर वह अच्छे कार्यों में अपना समय बिताएं, ताकि आगे वह किसी भी तरह के मुसीबत में ना पड़े।
प्री लिटिगेशन के बारे में जानकारियां देते हुए एसडीजेएम (SDJM) ने बताया कि हमें यह हमेशा कोशिश करना चाहिए कि किसी भी तरह की अगर परेशानी हो तो तुरंत केस दर्ज नहीं करें, बल्कि उसको प्री लिटिगेशन में लाकर दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया जाए। ताकि त्वरित उनके समस्या का समाधान हो सके।
दहेज मामलो के बारे में जानकारियां देते हुए उन्होंने कहा कि दहेज के लिए भी तुरंत मुकदमा नहीं करना चाहिए। आपसी समझौता कर उसका निपटारा करना चाहिए। मौके पर जेल अधीक्षक अनिमेष चौधरी, प्रभारी जेलर नीरज कुमार आदि मौजूद थे।
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