सरहुल प्रकृति व् साल वृक्ष की पूजा तथा कृषि कार्य की शुरुआत का प्रतीक-भादो टोप्पो
सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। वसंत ऋतू के आगमन को लेकर पश्चिमी सिंहभूम जिला के विभिन्न प्रमुख स्थलों पर आदिवासी समुदाय द्वारा 21 मार्च को सरहुल पर्ब का आयोजन किया गया। इस अवसर पर साल वृक्ष की पूजा कर बेहतर कृषि कार्य की कामना की गयी।
इस अवसर पर जिला के हद में गुवा हिरजी हटिंगा स्थिन सरना स्थल पर पाहन गोकुल बरुवा और शंकर टोप्पो ने सरहुल पर्व के अवसर पर प्रकृति पर्व में धरती, जंगल, जल की पूजा विधि विधान के साथ की। जिसमें देवी देवताओं से खुशीहाली के लिए कामना की गयी।
जानकारी के अनुसार गुवा हिरजी हटिंगा के उरांव समाज के लिए नए साल भी चैत्र नवरात्रि महीन में मनाया गया। उरांव समाज के पुरुषों, महिलाओं व् बच्चे भी पारंपरिक कपड़े पहने। यहां पुरुष कान पर फूल पहने जबकि महिलाओ ने फूल खोजें थे। रंगो से भी एक दूसरे को सरहुल पर्व के अवसर पर लगाये गये। शुभ यात्रा निकाली गई, घर घर जाकर पारंपरिक झंडा लगाया गया।
पंचायत सदस्य भादो टोप्पो ने उक्त अवसर पर कहा कि सरहुल झारखंड की जनजातियों द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख प्रकृति पर्व है, जो वसंत ऋतु में साल के वृक्षों पर नए फूल आने पर चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। कहा कि यह पर्व धरती-आसमान (सूर्य) के मिलन, प्रकृति के प्रति आभार, साल वृक्ष की पूजा और कृषि कार्य की शुरुआत का प्रतीक है। मौके पर चुन्नू टोप्पो, अजय लकड़ा, संजय टोप्पो, राजेश मिंज, रोहित लकड़ा, साबित्रा लकड़ा, लालीन टोप्पो, धनमित मिंज सहित दर्जनों महिला, पुरुष व् बच्चे शामिल थे।
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