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नारी शक्ति वंदन या भाजपा का सत्ता प्रबंधन, सामाजिक न्याय की हत्या-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। भारत की लोकतांत्रिक राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की लड़ाई कोई कल की बात नहीं है। यह संघर्ष दशकों, बल्कि सदियों पुराना है। स्वतंत्रता संग्राम से आज तक महिलाओं ने पुरुष-प्रधान व्यवस्था के खिलाफ अपना खून-पसीना बहाया है, लेकिन सत्ता के गलियारों में उनका हिस्सा हमेशा नाम मात्र का रहा है। उक्त बाते झारखंड के वरिष्ठ कांग्रेसी विजय शंकर नायक ने 16 अप्रैल को कही।

नायक ने कहा कि आज जब भाजपा सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को ऐतिहासिक क्रांति का नाम दे रही है। सच्चाई यह है कि यह अधिनियम न तो नारी शक्ति का वंदन है और न ही सच्ची क्रांति। यह केवल भाजपा का सत्ता प्रबंधन का शातिर खेल है। एक अधूरी क्रांति, जो सामाजिक न्याय की हत्या कर रही है। उन्होंने कहा कि वे कानून की हर छिपी सच्चाई, उसकी सीमाओं, छोटे राज्यों पर पड़ने वाले घातक प्रभावों और भाजपा-कांग्रेस के बीच सच्चे सामाजिक न्याय की लड़ाई को खोलकर रख देंगे। क्योंकि यह सिर्फ बिल नहीं, बल्कि भारत की आत्मा- सामाजिक न्याय और संघीय ढांचे पर हमला है। कहा कि इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने हीं रखी थी असली नींव, भाजपा ने सिर्फ चोरी की है।

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की नींव कोई अचानक भाजपा का आविष्कार नहीं है। यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की दूरदर्शिता का परिणाम है। कहा कि 1980 के दशक में तत्कालीन राजीव गांधी की सरकार ने पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का ऐतिहासिक कदम उठाया। यह वह दौर था जब महिलाएं राजनीति में सिर्फ प्रतीक थीं। तब राजीव गांधी ने सोचा कि अगर जड़ों से बदलाव आएगा, तो ऊपर तक पहुंचेगा।

73वें और 74वें संविधान संशोधन के जरिए लाखों महिलाएं पंचायतों में पहुंची। किसान की बेटी, मजदूर की मां, आदिवासी बहनें। बाद में सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने संसद में महिला आरक्षण बिल को बार-बार पेश किया। वर्ष 1996, 1998, 1999, 2008, 2010 में कांग्रेस ने इसे अपनी प्राथमिकता बनाया। कहा कि भाजपा ने 10 साल सत्ता में रहकर भी इसे ठंडे बस्ते में रखा। वर्ष 2014 से 2023 तक केंद्र की भाजपा नित नरेंद्र मोदी की सरकार ने संसद में कभी गंभीरता नहीं दिखाई। अचानक वर्ष 2023 में, जब लोकसभा चुनाव नजदीक थे, बिल पास कर दिया गया। क्यों? क्योंकि कांग्रेस ने लगातार दबाव बनाया था।

नायक के अनुसार राहुल गांधी ने संसद के अंदर और बाहर इसे मुद्दा बनाया। लेकिन भाजपा ने इसे मोदी की गारंटी का प्रचार बना दिया। यह चोरी का खेल है। कांग्रेस ने बीज बोया, भाजपा ने फसल काट ली। इतिहास में ऐसी चोरी पहले भी हुई है। कांग्रेस की योजनाओं को भाजपा ने नाम बदलकर अपना बताया, लेकिन जड़ें हमेशा कांग्रेस की रही है।

उन्होंने कहा कि सच्चाई अभी भी कड़वी, आंकड़े झूठ नहीं बोलते। आज भी लोकसभा में महिलाओं की संख्या महज 14-15 प्रतिशत है। राज्य विधानसभाओं में औसतन 9 प्रतिशत से कम। जबकि आबादी में महिलाएं 48 प्रतिशत हैं। दुनिया के कई देशों यथा रुआंडा में 61प्रतिशत, स्वीडन में 46 प्रतिशत महिलाएं आगे हैं, लेकिन भारत में? भाजपा शासन में यह आंकड़ा बढ़ा नहीं, बल्कि कुछ राज्यों में घटा है।

नायक ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे बड़े राज्यों में भाजपा की विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिशत कांग्रेस शासित राज्यों से कम है। यह साबित करता है कि भाजपा के पास इरादा नहीं, सिर्फ दिखावा है। 33 प्रतिशत आरक्षण एक सकारात्मक कदम लगता है, लेकिन क्या यह न्यायपूर्ण है? बिल्कुल नहीं। यह अधूरा, पक्षपाती और सत्ता-केंद्रित है। कहा कि महिलाओं का सुनियोजित बहिष्कार हो रहा है। भारत में ओबीसी आबादी सबसे बड़ी है। मंडल आयोग और विभिन्न सर्वे के अनुसार यह आकड़ा लगभग 52 है लेकिन इस कानून में ओबीसी महिलाओं के लिए कोई अलग आरक्षण नहीं है।

एससी-एसटी महिलाओं को आरक्षण के अंदर आरक्षण दिया गया जो सही है, लेकिन ओबीसी महिलाओं को सामान्य श्रेणी में धकेल दिया गया। यह न सिर्फ खामी नहीं, बल्कि भाजपा का सुनियोजित सामाजिक अपराध है। ओबीसी महिलाएं, पिछड़ी जातियों की बहनें, किसान परिवारों की बेटियां जो देश की रीढ़ हैं, उन्हें फिर से हाशिए पर धकेल दिया गया। राहुल गांधी ने इस पर सबसे सशक्त आवाज उठाई है। उन्होंने कहा है कि जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। यह नारा सिर्फ नारा नहीं, सामाजिक न्याय का संविधान है। कहा कि राहुल ने ओबीसी जनगणना की मांग की, क्योंकि बिना सच्चे आंकड़ों के न्याय कैसे होगा? उन्होंने संसद में स्पष्ट कहा कि बिना ओबीसी कोटा के यह कानून अधूरा है।

नायक ने कहा कि कांग्रेस ने बिल पास होने दिया, लेकिन समझौता नहीं किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी ने ओबीसी सब- कोटा, तुरंत लागू करने और जनगणना-सीमांकन की देरी पर सवाल उठाए है। इस मामले में भाजपा चुप है। क्योंकि ओबीसी वोट बैंक को बांटने का खेल है। कहा कि बिना समझौते के कांग्रेस ने बिल का समर्थन किया, क्योंकि महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाना हमारा मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने तीन बड़े सवाल खड़े किए ओबीसी महिलाओं को क्यों नजरअंदाज? लागू करने की तारीख क्यों नहीं तय? तथा जनगणना और सीमांकन के नाम पर देरी क्यों, जो 2029 या उसके बाद तक टाल दी गई है?

यह देरी भाजपा की चाल है चुनावी फायदे के लिए कानून को हवा में लटकाना। कांग्रेस ने हमेशा सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी है। मंडल आयोग लागू किया, आरक्षण बढ़ाया। भाजपा ने कभी ओबीसी का हित नहीं सोचा, सिर्फ हिंदुत्व के नाम पर बांटा। पिछले 10 साल में बीजेपी द्वारा घोषणा ज्यादा, इरादा शून्य। नायक ने सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि भाजपा ने क्यों नहीं लाया यह बिल? क्योंकि महिलाओं का सशक्तिकरण उनकी प्राथमिकता कभी नहीं थी। मनिपुर दंगों में महिलाओं पर अत्याचार, बिलकिस बानो जैसे मामलों में अपराधियों को राहत, यह भाजपा की सच्चाई है। भाजपा महिलाओं को सिर्फ वोट बैंक मानती है, सशक्त नागरिक नहीं।

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