माताएं होती हैं पुरुषार्थ की जन्मदात्री-कृतिमति देवी
माता का स्वरूप नारी को संपूर्णता प्रदान कराता हैं-कुमारी माला
प्रहरी संवाददाता/फुसरो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में नगर परिषद फुसरो के स्टाफ क्वार्टर ढोरी स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में 10 जनवरी को सप्तशक्ति संगम का भव्य आयोजन किया गया।
विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित सप्तशक्ति संगम में बड़ी संख्या में मातृ शक्ति उपस्थित थी। कार्यक्रम की शुरुआत अध्यक्षता कर रही पुनम सिंह, मुख्य अतिथि सीसीएल ढोरी क्षेत्र के विभागाध्यक्ष मानव संसाधन कुमारी माला अधिकारी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना को विद्यालय की प्रेरणा दीदी ने करते हुए कहा कि संप्तशक्ति संगम का उद्देश्य भारतीय नारीयों को आत्मिक शक्ति का बोध कराने से है। सप्त शक्ति के रूप में श्री, वाक, स्मृति, मेधा, धृति, क्षमा और कीर्ति जानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश का पौराणिक इतिहास रहा हैं कि जब जब आतताइयों का प्रादुर्भाव हुआ हैं, शक्ति का अवतार होकर उनका संहार हुआ है।

कुमारी माला ने कहा कि बच्चों के विकास मे माता की अग्रणी भूमिका होती हैं। कुटुंब व्यवस्था माता पर निर्भर हैं। झरना चक्रवर्ती ने कहा कि नारी में निहित सात शक्तियों का विकास करने से नारी शक्ति का विकास होगा। यहां संप्तशक्ति संगम की संयोजिका रूमी सरकार, विद्यालय के वरिष्ठ आचार्या रेणू सिंह ने नारी शक्ति के विकास करने हेतू संकल्प कराए।
उक्त कार्यक्रम में 280 महिला शक्ति सामिल हुई।
कार्यक्रम में अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य परमानन्द सिंह, अध्यक्ष शंकर सिंह, सचिव सुमित बंसल, सह सचिव अर्चना सिंह, सदस्य रोहित मित्तल, अंजली कुमारी, संकुल संयोजक अमित सिंह, कस्तूरबा विद्यालय के सचिव धिरज पांडेय, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर तुपकाडीह के प्रधानाचार्य मंटु गिरि, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर चलकरी के प्रधानाचार्य राम पुकार, जरीडीह बाजार सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य रमेशजी आदि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के प्रधानाचार्य परमानन्द सिंह, आचार्य विजय उपाध्याय, इन्द्रजीत सिंह, संजय पांडेय, जगदीश महतो, सुनील कुमार, प्रमेन्द्र सिन्हा, रजत दास, दीदीजी में रेणू सिंह, राखी मजूमदार, प्रेरणा कुमारी, खुशी कुमारी, सुषमा कुमारी , जंयतिका कुमारी, पूजा चक्रवर्ती तथा सभी कर्मचारीगण की अहम भूमिका रही।
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