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सरहुल पर्व पर बोकारो में भव्य आयोजन, परंपरा-प्रकृति व् एकता का दिया संदेश

डीसी, एसपी, डीडीसी हुए बाहा बोंगा पोरोब के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। प्रकृति एवं आदिवासी संस्कृति के महापर्व सरहुल के अवसर पर बोकारो जिला के हद में विभिन्न सरना स्थलों पर 21 मार्च को हर्ष व् उल्लास के साथ बाहा बोंगा पोरोब का भव्य आयोजन किया गया। जिला के हद में जरीडीह प्रखंड के दिशोम सरना धोरोम जाहेरगढ़, जैनामोड़ में भव्य एवं उत्साहपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, पारंपरिक वेशभूषा में महिला-पुरुष, युवा एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।

इस अवसर पर बेरमो विधायक कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह, बोकारो जिला उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा, पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरविंदर सिंह, उप विकास आयुक्त (डीडीसी) शताब्दी मजूमदार सहित कई गणमान्य की उपस्थिति रही। जानकारी के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान के साथ सरना स्थल पर प्रकृति पूजन से की गयी। पाहन एवं स्थानीय धार्मिक अगुवाओं द्वारा साल वृक्ष एवं प्रकृति के प्रतीकों की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद पारंपरिक नृत्य-गीत, मांदर और नगाड़ों की थाप पर कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिसने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम की भव्यता को और बढ़ाया।

मौके पर बेरमो विधायक कुमार जयमंगल ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार आदिवासी समाज के सम्मान, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का संरक्षक रहा है और सरकार उनकी परंपराओं एवं अधिकारों की रक्षा के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। उन्होंने कहा कि बोकारो जिला प्रशासन के सहयोग से जरीडीह स्थित इस ऐतिहासिक जाहेरगढ़ को आने वाले समय में एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा ने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आस्था, संतुलन और सह-अस्तित्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमें आदिवासी होने और अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व होना चाहिए। कहा कि अगर किसी ने जल, जंगल और जमीन की सच्चे अर्थों में रक्षा की है, वह आदिवासी समाज है। आदिवासियों ने हमेशा इस धरती, पर्यावरण और संस्कृति को बचाने का कार्य किया है। डीसी ने आमजनों से अपील की कि वे साल भर प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक रहें और आपसी भाईचारे, प्रेम एवं सद्भाव के साथ समाज को आगे बढ़ाएं।

मौके पर पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरविंदर सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज का प्रकृति संरक्षण में योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझें। कहा कि प्रत्येक जिलावासी कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल का संकल्प ले। उन्होंने कहा कि बोकारो जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सरहुल पर्व पारंपरिक तरीके से हर्षोल्लास एवं शांति के साथ मनाया जा रहा है, जिसमें जिला प्रशासन द्वारा विधि-व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

इस अवसर पर डीसी, एसपी आदि ने बीएस सिटी के नया मोड़ स्थित बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थल पर आयोजित सरहुल पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इससे पूर्व, डीसी – एसपी एवं अन्य अधिकारियों द्वारा पुष्प अर्पित कर धरती आवा भगवान बिरसा मुंडा के आदिवासी समाज उत्थान में दिए गए योगदान को स्मरण किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साह, उमंग और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। आदिवासी समाज के रहिवासियों ने पारंपरिक परिधान में एक-दूसरे को सरहुल की शुभकामनाएं दीं और प्रकृति के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

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