एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर 2 जुलाई को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) द्वारा केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया गया। उक्त जानकारी एआईएसएफ के झारखंड प्रदेश सह सचिव एहतेशाम परवीन ने दी।
उन्होंने बताया कि एआईएसएफ के राष्ट्रव्यापी अभियान देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो, एनटीए को रद्द करो के तहत राजधानी रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर झारखंड इकाई द्वारा जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन कर उनके इस्तीफे की मांग की गयी तथा एनटीए को तत्काल भंग करने की मांग की गई।
मौके पर नुक्कड़ सभा का आयोजन किया गया। नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए एआईएसएफ झारखंड प्रदेश सचिव विक्रम कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह संकट में डाल दिया है। एनटीए लगातार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का प्रतीक बन चुका है। बार-बार परीक्षा में गड़बड़ियां, पेपर लीक और प्रशासनिक विफलताएं साबित करती हैं कि सरकार छात्रों के भविष्य के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी निभाने के बजाय हर विफलता पर पर्दा डालने का काम किया है। यदि सरकार समझती है कि छात्र-युवा चुप बैठेंगे, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है। देश का छात्र समुदाय अब अन्याय और शिक्षा के निजीकरण पर चुप नहीं रहेगा।
प्रदेश सचिव विक्रम कुमार ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए और एनटीए को अविलंब भंग कर एक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली लागू की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की मांगों की लगातार अनदेखी की गई, तो एआईएसएफ पूरे झारखंड में आंदोलन को और व्यापक तथा तेज करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।
एआईएसएफ झारखंड प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों और एनटीए की कार्यप्रणाली के कारण देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य लगातार संकट में है। बार-बार परीक्षा में अनियमितताओं, पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन में विफलता तथा छात्रों के साथ हो रहे अन्याय ने शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। संगठन का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

मौके पर मौजूद एआईएसएफ प्रदेश सह सचिव अफ़ज़ल दुर्रानी ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था लगातार संकट के दौर से गुजर रही है। नीट समेत कई राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लग गया है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हर बड़ी परीक्षा के बाद पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, लेकिन केंद्र सरकार और एनटीए इन घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें तथा एनटीए को भंग कर एक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली लागू की जाए। कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दुर्रानी ने झारखंड में लागू क्लस्टर सिस्टम की भी कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस व्यवस्था के कारण पहले जिन कॉलेजों में बी. एससी. की पढ़ाई संचालित होती थी, वहां पढ़ाई बंद कर दी गई है। इससे हजारों छात्रों को अपने क्षेत्र से दूर जाने या उच्च शिक्षा से वंचित होने की नौबत आ गई है। उन्होंने मांग की कि क्लस्टर सिस्टम को तत्काल वापस लेकर पहले की तरह सभी कॉलेजों में बी. एससी. की पढ़ाई बहाल की जाए।
यदि केंद्र और राज्य सरकार छात्रों की इन न्यायसंगत मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लेती हैं, तो एआईएसएफ झारखंड राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज़ करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। प्रदेश सह सचिव एहतेशाम परवीन नेता ने कहा कि वर्ष 2013 में नीट ने ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट, स्टेट प्री मेडिकल टेस्ट और अन्य प्राइवेट मेडिकल कॉलेज एग्जाम को रिप्लेस किया। आज झारखंड में सिंगल नीट एग्जाम होने से कई छात्रों का डॉक्टर बनने का सपना केवल सपना ही रह गया। उन्होंने कहा कि आज कई छात्रों का दो से तीन सालों का ड्रॉप आउट हो रहा है। वर्ष 2012 वाली एग्जाम पॉलिसी को लागू करो। मौके पर एआईएसएफ के तेजू कुमार, उत्तम उरांव, फरमान आदील, साहील हसन, विभुति रंजन, नदीम अख़्तर, सुमीत कुमार, चन्दन गोराई, प्रसुन्न सिंह, पियुश वर्मा, राज सिंह, रोहित कुमार आदि उपस्थित थे।
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