रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड की प्रमुख नदियों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता अब तेज हो गई है। इसी क्रम में 16 अप्रैल को ‘स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ ने नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर केंद्रीय जलशक्ति राज्य मंत्री डॉ राज भूषण चौधरी से मुलाकात कर उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
मंत्री को सौंपे ज्ञापन में गरगा नदी (गर्ग-गंगा) सहित स्वर्णरेखा नदी, दामोदर नदी और बराकर नदी में लगातार बह रहे शहरी एवं औद्योगिक कचरे को रोकने और इन नदियों की सफाई के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई है। मंत्री ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि नदियों की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है और इन्हें हर हाल में बचाना जरूरी है। उन्होंने जल्द ही आवश्यक कार्रवाई का भरोसा भी दिया।
मंत्री से मुलाकात के दौरान महासचिव मुकुल ने गरगा नदी के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण काल में ऋषि गर्ग द्वारा उत्पन्न पवित्र जलधारा गर्ग-गंगा ही आज गरगा नदी के रूप में जानी जाती है, जिसे बोकारो क्षेत्र में गंगा के समान महत्व प्राप्त है।
हालांकि, वर्तमान में इस नदी की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है। बोकारो इस्पात संयंत्र और चास नगर निगम क्षेत्र से निकलने वाले गंदे नालों के कारण नदी का पानी काला पड़ गया है और दुर्गंध फैल रही है। इसी तरह स्वर्णरेखा नदी, जिसमें कभी सोने के कण पाए जाते थे, आज प्रदूषण की चपेट में है। दामोदर नदी और बराकर नदी की स्थिति भी लगातार बिगड़ती जा रही है, जिससे पर्यावरण और जन स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। संस्थान की ओर से केंद्र सरकार से इन नदियों के संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और पुनर्जीवन के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की गई है।
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