एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की खनिज संपदा पर भाजपा सरकार की केंद्रीय नीतियों को लेकर राज्य में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। केंद्र की लूटेरी नीतियों ने झारखंडी समाज को गरीब बनाया। यहां की खनिज सम्पदा बाहर गई और झारखंडीयों के हिस्से में गरीबी आई है।
आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने केंद्र की नीतियों को पूरी तरह लूट-प्रधान, कॉर्पोरेट-परस्त और संविधान-विरोधी करार दिया है।
केंद्रीय उपाध्यक्ष नायक ने 20 नवंबर को झारखंड की राजधानी रांची के हटीया स्थित अपने कार्यालय में कहा कि दिल्ली की हर नीति झारखंड के खिलाफ और निजी कंपनियों के पक्ष में बनाई गई है। कहा कि खनिज अधिकार छीना, कर अधिकार छीना और बदले में झारखंड को गरीबी, विस्थापन और कुपोषण सौंपा गया।
यह एक योजनाबद्ध लूट है जो अब बर्दाश्त नही किया जायेगा। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा की केंद्र की 5 सबसे बड़ी लूट नीति ने झारखंडी समाज की खनिज सम्पन्न होते हुए भी कंगाल बना कर रखा है जो संविधान के विरुद्ध है। उदाहरण देते हुए कहा कि कोयला संपदा पर सीधा कब्ज़ा कर 35 लाख करोड़ का कोयला निकाला गया और झारखंड को 4–5 प्रतिशत का टुकड़ा दिया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले 8 वर्षों में झारखंड से 35 लाख करोड़ रुपए का कोयला निकाला गया, लेकिन राज्य को रॉयल्टी के रूप में सिर्फ 4–5 प्रतिशत हिस्सा मिला।
संसाधन हमारे और मुनाफा दिल्ली व कंपनियों का, यह लोकतंत्र नहीं, संगठित सरकारी लूट है
उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच झारखंड के अधिकांश कोल ब्लॉक निजी कॉर्पोरेट घरानों को सौंप दिए गए। यह न केवल गाँवों को उनके अधिकार से वंचित करता है बल्कि ग्राम सभा की भूमिका को भी खत्म कर देता है। बताया कि केंद्र ने राज्य के 90 प्रतिशत कोल ब्लॉक निजी कंपनियों को सौंप दिया। पाँचवीं अनुसूची को कचरे में फेंक दिया गया।
नायक ने कहा कि पाँचवीं अनुसूची और पेसा एक्ट को केंद्र सरकार ने कागज़ का टुकड़ा बना दिया।
ग्राम सभा, आदिवासी, जल-जंगल-जमीन सभी को बेमानी कर दिया गया। आज महाराष्ट्र दिल्ली एवं अन्य राज्यों में 24 घंटे बिजली, गुजरात एवं अन्य राज्यों में बड़े बड़े उद्योगो, कारखानों का तेजी से विस्तार हो रहा है, लेकिन झारखंड में अब भी गाँवों में अंधेरा है। बेरोजगारी, कुपोषण, पलायन, गरीबी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ऊर्जा राष्ट्र की, अंधेरा झारखंड का यह विकास का दोहरा मानदंड हैं।
नायक ने तीखा सवाल उठाया तथा कहा कि हमारे कोयले से दूसरे राज्यों की चमक क्यों और हमारे ही गाँवों के बच्चे अंधेरे में क्यों? राज्य के अधिकारों की दूसरी बड़ी लूट जीएसटी लागू होने के बाद झारखंड का 18,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का अपना स्थायी कर अधिकार खत्म कर दिया गया। वर्ष 2022 से मुआवजा भी रोक दिया गया। कहा कि पहले खनिज लूट, फिर टैक्स लूट, केंद्र सरकार ने झारखंड की रीढ़ तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
एमएमडीआर के संशोधनों (1957, 2015, 2021) के जरिए राज्य की खनिज पर संप्रभुता लगभग खत्म कर दी गई। यह सातवीं अनुसूची की पूरी तरह अवमानना है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने संसाधन का अधिकार भी छीना और नियमन का अधिकार भी। यह न नीति है, न सुधार। यह राज्य संघीय ढांचे पर सीधा हमला है। नायक ने कहा कि अलग-अलग नीतियाँ नहीं, बल्कि केंद्र की कॉर्पोरेट-फ्रेंडली लूट व्यवस्था का हिस्सा हैं।
उन्होंने लूट नीति को निरस्त कर, अधिकार बहाल करने, एमएमडीआर के सभी विवादित संशोधन तुरंत रद्द करने, सभी कोल ब्लॉक का स्वामित्व झारखंड सरकार को वापस देने, खनिज राजस्व का 50 प्रतिशत से अधिक सीधे राज्य को देने, पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य करने, झारखंड को विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा देने, जीएसटी नुकसान का पूर्ण और तत्काल मुआवजा देने की मांग की है।
नायक ने स्पष्ट कहा कि अब झारखंड व् झारखंडी समाज चुप नहीं बैठेगा और केंद्र की लूट के खिलाफ अब न्याय अदालत में नहीं, जनता की अदालत सड़कों पर होगा। कहा कि संविधान बचाएँगे, झारखंड बचाएँगे और अपना हक़ लेकर रहेंगे।
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