एस. पी. सक्सेना/बोकारो। इस बार के लोक सभा चुनाव के दौरान अनेको घटनाएं ऐसा घटित हो रहा है जिसे देख व सुनकर आंखो और कानों पर भरोसा ही नहीं होता। खासकर गिरिडीह लोकसभा चुनाव की अगर चर्चा करे तो यहां काफी उहा पोह यानी ना-समझ आने वाली स्थिति नजर आती है।
बताता चलूं कि यहां के वर्तमान सांसद की बात करे तो यहां से एनडीए गठबंधन आजसू के है जो दुसरी बार फिर एकबार चुनावी मैदान में प्रबल दावेदार के रुप में होने के बाद भी जनता के सवालों से घीरे नजर आ रहे हैं।
वही इंडी गठबंधन झामुमो के मथुरा प्रसाद महतो के अलावे निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में डॉ उषा सिंह चुनाव लड़ने की ताल ठोकती नजर आ रही है। इसी बीच बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड के खेतको रहिवासी सोशल मीडिया पत्रकार मो. इश्तेयाक अहमद निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में चुनाव लड़ने के लिए चुनावी रण में उतने लिए कमर कस ली है। उन्होंने आगामी छह मई को नामांकन करने की घोषणा भी कर दी है।
इस्तेयाक ने 27 अप्रैल को बताया कि लोकसभा चुनाव प्रक्रिया से एक विशेष समुदाय को बाहर का रास्ता दिखाने का काम हर पार्टी ने किया है। जिससे अल्पसंख्यक समुदाय खुद को ठगा और उपेक्षित महसुस कर रहा है। इन्ही उपेक्षा के विरुद्ध उन्होंने विशेष समुदाय का विश्वास बनाये रखने को लेकर चुनावी मैदान में उतरने का मन बनाया।
कहा कि क्षेत्र के तमाम आम व् खास रहिवासियों द्वारा मिल रहे जन समर्थन से उनका हौसला और भी बढ़ा है। अंततः उन्होंने नामांकन करने की तिथि की घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें विभिन्न राजनीतिक और गैर राजनीतिक दलों का भरपूर समर्थन मिल रहा है, जिससे कई बड़े नेताओं के चेहरे पर अभी से ही पेशानी दिखना शुरू हो गया है।
किन किन का मिल रहा है इन्हे समर्थन
निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा करनेवाले इस्तेयाक अहमद के अनुसार उन्हें एआईएमआईएम, भारतीय मानवता जन अधिकार पार्टी, समता सैनिक दल, अंतर्राष्ट्रीय मानवता अधिकार एंव मिडिया संगठन एजुकेशन सेल का भरपूर समर्थन मिल रहा है। उन्होंने अपनी चुनावी घोषणा पत्र में जन कल्याण कार्यों की लम्बी फेहरिस्त जारी करते हुए दावा किया है कि उनकी जीत सुनिश्चित है।
उन्होंने कहा कि वे अच्छे खासे वोट से इस लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करेंगे। अब समय तय करेगा कि उक्त प्रत्याशी के दावों मे कितना दम है।
चुनाव जीतने के बाद इस्तेयाक ने जन कल्याण के काम करने का किया दावा
यूं तो चुनाव के समय प्रत्याशियों द्वारा वोट हासिल करने के लिए लंबे लंबे दावे किए जाते हैं. इसी क्रम में निर्दलीय प्रत्याशी इस्तेयाक अहमद ने चुनाव जितने के बाद आमजनों को लाभ पहुंचाने के जो दावे कर रहे हैं उसमे सलाना 50,000 बेरोजगारों को रोजगार देने के अलावे अनेको लोक लुभावन दावे किए हैं।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध उनकी लगातार लड़ाई जारी रहेगा। वे कभी भी संसदीय वेतन नही लेंगे। कोई भी सरकारी सुख सुविधा भी नही लेंगे। क्षेत्र के विस्थापितो को हक अधिकार दिलाएंगे। इसके अलावे अपने क्षेत्र का पुर्न विकास करेंगे। उन्होंने दावा किया कि जीत के बाद यदि वे वादे नही निभाये तो स्वयं जनता की अदालत में खड़ा हो होंगे और जनता जो भी दंड देगी उन्हें मंजूर होगा।
उन्होंने पत्रकारों को लेकर कहा कि जीत के बाद उनका यह फर्ज होगा कि पत्रकारों के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करवाने का दबाव सरकार पर बनाएंगे और सभी पत्रकारों के लिए मासिक वेतन सुनिश्चित करवाने का काम करेंगे।
बहरहाल चुनाव का समय है। सभी प्रत्याशी के अपनी डफली अपना राग देखने और सुनने को मिलेगा। मगर सच यही है कि इस लोकसभा चुनाव को लेकर गिरिडीह की जनता मुक दर्शक बने हर प्रत्याशी को नापने तौलने मे जुटी हैं, क्योंकि फैसला तो अंततः जनता को हीं करना है। आखिर जनता हीं लोकतंत्र का मालिक जो ठहरा।
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