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जैविक खेती को लेकर कृषकों को मिला प्रशिक्षण

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। लीड्स संस्था व एचडीएफसी बैंक शाखा के संयुक्त तत्वावधान में बोकारो जिला के हद में पेटरवार में 26 अगस्त को एचआरडीपी परियोजना के अंतर्गत जैविक खेती पर एक दिवसीय कृषि प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण शिविर में चरगी पंचायत और कोह पंचायत के किसान को जैविक विधि से खेती एवं इसके लाभ के बारे में जानकारी दी गयी।

जानकारी के अनुसार इस प्रशिक्षण शिविर में संस्था के परियोजना प्रबंधक ब्रजेश कुमार ने सबसे पहले कार्यक्रम की शुरुआत किसानों का स्वागत कर किया। उन्होंने परियोजना के अंतर्गत पंचायत में चलाए जा रहे योजना के बारे में जानकारी दी। कुमार ने कहा कि भारत में लगभग 60 से 70 फीसदी जनसंख्या अपनी आजीविका निर्वहन के लिए कृषि कार्यों पर निर्भर है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के पूर्व भारत में की जाने वाली खेती में किसी प्रकार के रासायनिक पदार्थों का उपयोग नहीं किया जाता था, लेकिन जनसंख्या विस्फोट के कारण अन्न की माँग बढ़ने लगी और धीरे धीरे लोगों ने कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करना प्रारम्भ कर दिया।

जिस कारण लोग आज विभिन्न प्रकार की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जैविक खेती पर्यावरण की शुद्धता बनाए रखने के साथ ही भूमि के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखती है। संस्था के विषय में विशेषज्ञ रबिंदर कुमार प्रामाणिक ने सभी किसानो के बीच जैविक खेती के बारे विस्तार से चर्चा किए एवं रासायनिक खाद्य के दुष्प्रभाव के बारे में बताया।

जैविक विधि पुनः अपनाने और अधिक पैदावार कैसे हो, किस जैविक दवाई का प्रयोग अपने खेत में करे इस पर चर्चा की। अपने खेत में अधिक पैदावार के लिए अपने घर के आस पास उपलब्ध संसाधन जैसे गाय का गोबर, गोमूत्र, नीम, करंज, गुड़, बेसन, केचुवा खाद से जैविक दवाई जैसे नीमस्त्र, घनजीवामित्र, ब्रह्मास्त्र, बीजामित्र जैसे दवाई घर में उपलब्ध संसाधन से बनाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है।

इस प्रशिक्षण शिविर में कृषि विज्ञान केंद्र पेटरवार के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉक्टर उदय सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहे।प्रशिक्षण में सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में मिट्टी को बचाने के लिए हमें जैविक खेती की ओर लौटना पड़ेगा। हम कोरोना काल में नए-नए बीमारियों को देख रहे हैं।

कहीं ना कहीं हमारे द्वारा प्रकृति के साथ केमिकल डालकर किया गया खिलवाड़ का परिणाम है। उन्होंने जैविक विधि के तरीक़े और उसे अपनाने के महत्व पर प्रकाश डाला और पशुपालन और जैविक खेती पर मूलमंत्र किसानो को दिए। शिक्षा विशेषज्ञ अभय कुमार प्रजापति द्वारा धन्यवाद ज्ञापन कर प्रशिक्षण का समापन किया गया।

इस अवसर पर बैनर के साथ रैली भी निकाली गई। कार्यक्रम में संस्था के अजीत मुर्मू, मनोज टूडू, कमलेश महतो, जितेंद्र महतो, राकेश महतो, धीरज कुमार आदि उपस्थित थे।

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