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संस्कृति को आगे बढ़ाने में आदिवासी महिलाओं का अहम योगदान-सुदीप सिंकूa

सिद्धार्थ पांडेय/जमशेदपुर (झारखंड)। पश्चिमी सिंहभूम जिला (West Singhbhum District) के हद में बैंक ऑफ इंडिया गुवा शाखा के वरीय प्रबंधक सुदीप सिंकू ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर एक भेंट में कहा कि वर्तमान परिवेश में शिक्षा के माध्यम से आदिवासियों को अपना अधिकार प्राप्त करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस बार विश्व आदिवासी दिवस का थीम ‘पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और प्रसारण में स्वदेशी महिलाओं की भूमिका’ पर इस वर्ष आदिवासी दिवस मनाया गया।

वरीय प्रबंधक सिंकू ने बताया कि सही मायने में देखा जाए तो आदिवासियों की संस्कृति को आगे बढ़ाने में आदिवासी महिलाओं का अहम योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1982 में जिनेवा में आयोजित मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण पर उप-आयोग की स्वदेशी आबादी पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह की पहली बैठक की मान्यता में तारीख का चयन किया गया था।

आदिवासी शब्द दो शब्दों ‘आदि’ और ‘वासी’ से मिल कर बना है। इसका अर्थ मूल निवासी होता है। भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बनी है। उन्होंने बताया कि भारत की जनसंख्या का 8.6 प्रतिशत (लगभग 10 करोड़) जितना एक बड़ा हिस्सा आदिवासियों का है।

भारतीय संविधान में आदिवासियों के लिए ‘अनुसूचित जनजाति’ पद का उपयोग किया गया है। भारत के प्रमुख आदिवासी समुदायों में आंध, गोंड, खरवार, मुण्डा, खड़िया, बोडो, कोल, भील, कोली, सहरिया, संथाल, मीणा, भूमिज, उरांव, लोहरा, बिरहोर, पारधी, असुर, टाकणकार, खसिया, मुंडारी, हो आदि शामिल है।

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