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लोकतंत्र बचाओ पाखंड बंद करे भाजपा अन्यथा भाजपा हटाओ अभियान-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। लोकतंत्र बचाओ अभियान भाजपा का राजनीतिक पाखंड है। लोकतंत्र बचाने का ढोंग बंद करे भाजपा, नहीं तो शुरू होगा भाजपा हटाओ, लोकतंत्र बचाओ अभियान। चुनावी पारदर्शिता पर केद्र सरकार देश को जवाब दे। उक्त बाते झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 22 अक्टूबर को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने भाजपा के प्रस्तावित लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ पदयात्रा अभियान पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जिस भाजपा की राजनीति विपक्ष को कटघरे में खड़ा करने और असहज सवालों से बचने में गुजर रही है, उसे लोकतंत्र का स्वयंभू रक्षक बनने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। कहा कि लोकतंत्र बचाने का ढोंग करने से पहले भाजपा और केंद्र की मोदी सरकार को चुनावी पारदर्शिता, चुनाव आयोग की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों का जवाब देना चाहिए, वरना सड़कों पर अब गूंजेगा भाजपा हटाओ, लोकतंत्र बचाओ का नारा।

नायक ने कहा कि भाजपा की राजनीति का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि जब विपक्ष लोकतंत्र, संविधान और चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, तब भाजपा जवाब देने के बजाय राजनीतिक आरोपों की आड़ लेने लगती है। लेकिन, जब खुद भाजपा लोकतंत्र बचाने का नारा देती है, तो उसे अपने आचरण और केंद्र सरकार की जवाबदेही पर भी नजर डालनी चाहिए। कहा कि लोकतंत्र कोई चुनावी नारा नहीं, जिसे राजनीतिक जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल किया जाए।

यह संविधान, निष्पक्ष चुनाव और जनता के मताधिकार की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, दो पूर्व चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दों पर केंद्रीय कैबिनेट सचिव को पत्र लिखे थे। इन रिपोर्टों में आयोग की कार्यप्रणाली, अधिकारियों की जिम्मेदारी, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की भूमिका, फाइल नोटिंग और कार्रवाई के विवरण को लेकर सवाल सामने आए हैं। इन मामलों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित पत्रों और आधिकारिक दस्तावेजों को सार्वजनिक विमर्श के सामने लाना तथा निष्पक्ष स्पष्टीकरण देना आवश्यक है।

नायक ने सवाल किया कि यदि चुनावी व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर पूर्व चुनाव आयुक्तों को भी पत्र लिखने की जरूरत पड़ी, तो भाजपा और केंद्र सरकार इन सवालों पर चुप्पी क्यों साधे हैं? क्या लोकतंत्र की रक्षा का ठेका केवल भाजपा के पास है? क्या चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाना विपक्ष का अपराध है। कहा कि इन्हीं मुद्दों पर जवाब मांगने वालों को राजनीतिक निशाना बनाना भाजपा का अधिकार है? उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग देश की एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है। उसकी निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर उठने वाले सवालों को राजनीतिक शोर में दबाया नहीं जा सकता।

भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, शिकायतों का निष्पक्ष निपटारा करने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। सवालों का जवाब देने के बजाय विपक्ष पर हमला करना जवाबदेही से भागने की राजनीति है।

नायक ने भाजपा के प्रस्तावित पदयात्रा अभियान पर निशाना साधते हुए कहा कि 23 अक्टूबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के झारखंड की राजधानी रांची आगमन और 27 अक्टूबर की प्रस्तावित पदयात्रा से पहले भाजपा नेताओं को झारखंड की जनता को बताना चाहिए कि उनका लोकतंत्र बचाओ नारा आखिर किसके लिए है। जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए या राजनीतिक विरोधियों पर हमला करने के लिए? उन्होंने कहा कि भाजपा को पहले अपने राजनीतिक आचरण का हिसाब देना चाहिए, फिर दूसरों को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाना चाहिए।

कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सत्ता से सवाल पूछना है, और सत्ता की जिम्मेदारी उन सवालों का जवाब देना है। जो सरकार और राजनीतिक दल सवालों से घबराते हैं, वे लोकतंत्र को मजबूत नहीं करते, बल्कि जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने कहा कि देश की जनता महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर जवाब चाहती है। भाजपा इन सवालों से ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक अभियानों और नारों का सहारा न ले।

जनता अब केवल भाषण नहीं, जवाबदेही चाहती है; केवल प्रचार नहीं, पारदर्शिता चाहती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस संविधान, लोकतंत्र, स्वतंत्र संस्थाओं और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी। भाजपा चाहे जितने राजनीतिक अभियान चला ले, चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही से जुड़े सवालों को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले जवाब दे, फिर उपदेश दे। चुनावी पारदर्शिता पर सवालों का जवाब दिए बिना लोकतंत्र बचाओ का नारा देना जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। लोकतंत्र भाजपा की राजनीतिक जागीर नहीं है। देश का लोकतंत्र संविधान से चलेगा, किसी पार्टी के प्रचार और अहंकार से नहीं।

 

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