रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार पंचायत में जनहित से जुड़े विकास कार्यों और पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वार्ड सदस्य सेवा देवी ने पंचायत में बंद पड़े चापाकल और जलापूर्ति व्यवस्था की समस्या को उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
वार्ड सदस्या का आरोप है कि पंचायत में समस्याओं के समाधान के बजाय राजनीति और अफसरशाही का प्रभाव दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, कसमार प्रखंड के अंतर्गत इससे पहले दो पंचायत सचिवों का भ्रष्टाचार से संबंधित आरोपों के बीच तबादला हो चुका है। हालांकि, इन मामलों की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
वर्तमान पंचायत सचिव को समस्या से अवगत कराने पर उन्होंने कथित तौर पर बताया कि जांच के लिए जलसहिया को भेजा गया था। इस पर वार्ड सदस्य ने सवाल उठाया कि यदि कसमार पंचायत की जलसहिया का निधन हो चुका है और उनके स्थान पर अब तक किसी अन्य की नियुक्ति नहीं हुई है, तो जांच के लिए कौन पहुंचा था? इस विषय पर स्पष्ट जवाब और जांच की वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए।
वार्ड सदस्या के अनुसार, संबंधित विभाग के जेई को भी जानकारी दी गई है कि पंचायत के मैकेनिक देबू मुखर्जी द्वारा कथित तौर पर ब्लू कनेक्शन जलापूर्ति बंद कर दी गई है।
इससे पहले जल टंकी की आपूर्ति भी बंद होने की बात कही गई है। ऐसे में स्थानीय रहिवासियों के सामने पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई है। कहा कि जब पूजा का समय नजदीक है, तब पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा का बाधित रहना आम जनों के लिए परेशानी का विषय है। बंद पड़े चापाकलों की मरम्मत और जलापूर्ति बहाल करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह की है कि कसमार पंचायत में बंद पड़े चापाकलों, जल टंकी और ब्लू कनेक्शन जलापूर्ति व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, पंचायत सचिव, संबंधित जेई और जिम्मेदार कर्मियों की भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। कहा है कि कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यदि जनहित के कार्य बाधित होते हैं, इससे आम जनों का विश्वास प्रभावित होता है और सरकार की छवि पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हमारी मांग है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द जांच कराई जाए तथा बंद पड़े चापाकलों की मरम्मत हो और पेयजल व्यवस्था को सुचारु रूप से बहाल किया जाए। कहा कि आमजनों को आश्वासन नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए।
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