सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में नोवामुंडी स्थित टाटा डीएवी पब्लिक स्कूल प्रांगण में एक अक्टूबर को कंप्यूटेशनल थिंकिंग पर एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।
जानकारी के अनुसार विद्यालय के शिक्षकों और छात्रों के तकनीकी एवं विश्लेषणात्मक कौशल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कंप्यूटेशनल थिंकिंग विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यशाला में रिसोर्स पर्सन के रूप में विद्यालय की प्राचार्या शशिकला एवं अंग्रेजी विषय के वरिष्ठ शिक्षक प्रदीप दास उपस्थित थे। विशेषज्ञों द्वारा समस्याओं को क्रमिक रूप से हल करने, लॉजिकल रीजनिंग और डिजिटल युग में कंप्यूटर आधारित सोच के महत्व पर प्रकाश डाला गया।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को कंप्यूटेशनल थिंकिंग के मूलभूत सिद्धांतों से अवगत कराया गया। संबोधित करते हुए प्राचार्या शशिकला ने कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में समस्याओं के विश्लेषणात्मक समाधान की क्षमता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। कंप्यूटेशनल थिंकिंग बच्चों में तार्किक क्षमता और रचनात्मकता को बढ़ाती है, जो उनके भविष्य के लिए बेहद कारगर साबित होगी।
इस क्रम में पी. के. दास ने कहा कि आज का युग सूचना प्रौद्योगिकी और तकनीक का युग है। यदि शिक्षक और छात्र समस्या को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर समाधान खोजने की कला सीख लेंगे, तो किसी भी जटिल समस्या का समाधान सरल हो जाएगा। कहा कि यह कार्यशाला सभी के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और उपयोगी रहेंगी। प्रथम दिवस कार्यशाला का समापन शांति पाठ गाकर किया गया। इसमें विद्यालय के कुल 24 शिक्षकों ने भाग लिया। वहीं मौके पर सभी कर्मचारी उपस्थित थे।
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