अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहर क्षेत्र सोनपुर के पतित-पावनी नारायणी नदी के काली घाट के ऊंचे डीह पर कोलकाता के बाद बिहार की दूसरी प्रसिद्ध दक्षिणेश्वरी काली मंदिर स्थित है। अवस्थित महाकाल या महाकालेश्वर शिव लिंग करोड़ों भक्तों की अगाध श्रद्धा का केंद्र है। महाकाल शिव लिंग की पूजा व जलाभिषेक से देवी दक्षिणेश्वरी काली भक्तों पर प्रसन्न होती है। उनकी मनोकामना पूर्ण होती है।
लोक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में शिव लिंग एवं देवी काली के विग्रह की स्थापना कोलकाता के एक सिद्ध पुजारी द्वारा की गई थी। समय के साथ कई भक्तों के सहयोग से इसका संरक्षण हुआ। हाल के वर्षों में धर्मेन्द्र सिंह, ब्रजेंद्र सिंह और ज्ञानेन्द्र सिंह ‘टुनटुन’ के विशेष प्रयासों से मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया गया है। मंदिर बंगला स्थापत्य शैली में बना है।
सोनपुर लकड़ी बाजार रहिवासी श्रद्धालु धनंजय सिंह ने 2 अगस्त को भेंट में बताया कि मंदिर के गर्भगृह और परिसर की नित्य सुबह – शाम सफाई होती है। शिव शक्ति स्थल होने के कारण दूर राज्यों से भी भक्तगण दर्शन को आते रहते हैं। पुजारी वैद्यनाथ गिरि बताते हैं कि सावन में शिव लिंग का प्रतिदिन श्रृंगार, महाशिवरात्रि में विशेष पूजा करने वाले भक्तों की भीड़ जुटती है। समय समय पर मंदिर में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप आदि होते रहते हैं। पूर्णतः सात्विक पद्धति से पूजा-अर्चना एवं आरती संपन्न की जाती है।
सोनपुर गांव रहिवासी बिंदु देवी कहती हैं कि श्रावण माह में देवी की पूजा के साथ यहां शिवलिंग पर जलाभिषेक से माता प्रसन्न होती हैं। यहां के पुजारी भक्ति और श्रद्धा के साथ विधि सम्मत तरीके से नित्य पूजा -आराधना करते हैं। सुबह -शाम की आरती पूर्णतः मन को शांति देती है। सोनपुर रहिवासी अवधेश कुमार सिंह का कहना है कि इस मंदिर का आध्यात्मिक महत्त्व इतना गहन है कि यहां सैकड़ों वर्षों से भूटान, असम, नगालैंड, मिज़ोरम और बंगाल तक से शक्ति-उपासक आकर शिव-शक्ति की आराधना करते रहे हैं। मां काली के गले में सुशोभित मुंड माला अत्याचारियों के दमन और भक्तों के कष्ट-निवारण का प्रतीक है।
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