अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सरकार के सुरक्षित बचपन, सुरक्षित शिक्षा के दावों की पोल खोलती एक बेहद डरावनी तस्वीर सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड से सामने आई है। यहां सोनपुर प्रखंड के सबलपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय बतरौली-2 (यू डाइस कोड: 10171905201) में 7 जुलाई को उस वक्त चीख-पुकार मचते-मचते बची, जब स्कूल की जर्जर बिल्डिंग का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
गनीमत रही कि शिक्षकों ने ऐन वक्त पर सूझबूझ दिखाई और परीक्षा दे रहे मासूम बच्चों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाला, वरना आज कई घरों के चिराग बुझ सकते थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, 7 जुलाई को विद्यालय में सभी छात्र-छात्रा अपनी त्रैमासिक परीक्षा दे रहे थे। बच्चे अपनी कॉपियों पर ध्यान केंद्रित किए थे कि तभी अचानक छत और दीवार का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर गया। शिक्षकों की त्वरित सतर्कता के कारण बच्चों को मलबे की चपेट में आने से बचा लिया गया। सवाल यह उठता है कि आखिर मासूमों की जिंदगी के साथ यह जानलेवा खिलवाड़ कब तक चलेगा?
ज्ञात हो कि यह घटना कोई अचानक हुआ हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों ने साफ तौर पर कहा कि
विद्यालय भवन की बदहाल और जर्जर स्थिति के बारे में शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन को कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराया जा चुका है। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ग्रामीणों ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इस तथाकथित शिक्षा के मंदिर की छत के टुकड़े गिरने से कई शिक्षिका और छात्र गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। बावजूद इसके न तो भवन की मरम्मत कराई गई, न इसे असुरक्षित घोषित कर ध्वस्त किया गया और न ही बच्चों के बैठने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
सरकार और जिला प्रशासन से सीधा सवाल
सवाल उठना लाजमी है कि क्या शिक्षा विभाग किसी बच्चे की जान जाने के बाद ही जागेगा? जब स्कूल की हालत सालों से जर्जर है, तो आपदा प्रबंधन और विद्यालय विकास फंड की राशि का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया? लापरवाही की जवाबदेही किसकी? बार-बार लिखित सूचना देने के बाद भी फाइलों को दबाकर बैठने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी। स्थानीय ग्रामीणों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि तत्काल प्रभाव से विद्यालय भवन का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। इस खूनी जर्जर हिस्से को तुरंत ध्वस्त कर नए सुरक्षित भवन का निर्माण शुरू हो।
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए तुरंत वैकल्पिक एवं सुरक्षित व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन ने अपनी कुंभकर्णी नींद नहीं तोड़ी, तो भविष्य में होने वाली किसी भी अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और सारण जिला प्रशासन की होगी और इसके खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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