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स्वामी सहजानंद सरस्वती के 76 वें महापरिनिर्वाण दिवस पर किसानों की हुंकार

सरकार से टोपोलैंड और कॉरिडोर मुआवजे पर स्थायी समाधान की मांग

​अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। आजादी की लड़ाई में किसानों की आवाज बुलंद करने वाले किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती के 76वें महापरिनिर्वाण दिवस पर 26 जून को सारण जिला के हद में सोनपुर अंचल के सबलपुर मध्यवर्ती पंचायत (बभनटोली) स्थित योगिराज गोरखाई नाथ शिव शक्ति मंदिर परिसर में एक विशाल समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसानों ने पहुंचकर स्वामी सहजानंद के तैल चित्र पर माल्यार्पण तथा पुष्पार्पण किया।

संयुक्त किसान संघर्ष समिति सबलपुर द्वारा आयोजित इस समारोह में वक्ताओं ने स्वामी सहजानंद के संघर्षों को याद करते हुए वर्तमान समय में किसानों की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त की। वक्ताओं ने दो टूक कहा कि देश की आजादी के दशकों बाद भी यहां का किसान आज भी उन्हीं बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है, जो आजादी से पहले थी।
​इस अवसर पर किसानों के हितों और क्षेत्र के विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पत्र पारित किया गया, जो सरकार के लिए नीतिगत लाभ और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के दृष्टिकोण से बेहद अहम है।

​समारोह की अध्यक्षता कर रहे किसान नेता ब्रज किशोर शर्मा द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में सरकार और प्रशासन के समक्ष रखी गई मांगों में टोपोलैंड पर से रोक हटे, बाढ़-कटाव का स्थायी समाधान किया जाये। ​सबलपुर सहित पूरे दियारा क्षेत्र की पंचायतों को हर साल बाढ़ और भीषण नदी कटाव का सामना करना पड़ता है। सरकार से मांग की गई कि इसका स्थायी तकनीकी समाधान निकाला जाए। किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए टोपोलैंड पर लगी रोक को तत्काल हटाया जाए, ताकि किसानों को उनकी जमीन का उचित लाभ मिल सके।

हरिहरनाथ कॉरिडोर: विस्थापितों को मिले उचित मुआवजा व पुनर्वास

पारित ​प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया कि हरिहर नाथ कॉरिडोर के निर्माण से जो भी परिवार संभावित रूप से विस्थापित (बेघर) होंगे, सरकार पहले उन्हें उचित मुआवजा दे और उनके पुनर्वास की पुख्ता व्यवस्था करे। ​सोनपुर की ऐतिहासिक धरोहर लोक सेवा आश्रम जिसने कला और संस्कृति के क्षेत्र में देश स्तर पर पहचान बनाई है, उसे संरक्षित घोषित किया जाए।

​आश्रम परिसर में स्थित मंदिर निर्माण पर लगी रोक को तुरंत हटाया जाए। साथ ही, सभी धर्मों के ऐतिहासिक मठ-मंदिरों को संरक्षित कर उन्हें कॉरिडोर का ही हिस्सा माना जाए।
प्रस्ताव में इसके अतिरिक्त हरिहरनाथ थाना से सबलपुर गंगा-गंडक के मूल संगम स्थल तक सड़क का चौड़ीकरण और विस्तार किया जाए। बिहार की राजधानी पटना की तर्ज पर कालीघाट से सबलपुर संगम होते जेपी सेतु तक एक भव्य मरीन ड्राइव का निर्माण किया जाए, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय रहिवासियों को जाम से मुक्ति व रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

​किसानों के इस मंच से शिक्षा और युवा प्रेरणा को भी बढ़ावा दिया गया। सबलपुर बभनटोली रहिवासी और बिहार लोक सेवा आयोग में चयनित होकर अधिकारी बने कमलनयन शर्मा को उनकी इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए मंच पर मुख्य अतिथि व अध्यक्ष ब्रज किशोर शर्मा एवं अन्य द्वारा अंग-वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण परिवेश से निकलकर युवाओं का ऐसे उच्च पदों पर जाना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।

आयोजित महापंचायत सह सम्मान समारोह में मंच का कुशल संचालन सबलपुर मध्यवर्ती पंचायत के पूर्व मुखिया व सोनपुर भाजपा दक्षिणी मंडल अध्यक्ष दीपक शर्मा ने किया।​ इस अवसर पर विचार व्यक्त करने वाले मुख्य वक्ताओं में
​ब्रज किशोर शर्मा (किसान नेता),​विजय कुमार शर्मा (किसान नेता),​धर्मनाथ शर्मा (जेपी सेनानी), दिलीप सिंह (सरपंच, मध्यवर्ती पंचायत), ​मनोज ठाकुर (किसान नेता, वैशाली), ​शंभूनाथ शर्मा, शत्रुघ्न शर्मा, महेश्वर नारायण सिंह, जितेन्द्र सिंह, अनुपम कुमार गौतम, अरविंद शर्मा, इंद्रजीत, मुकेश कुमार शर्मा सहित भारी संख्या में स्थानीय किसान और ग्रामीण रहिवासी शामिल थे।

ज्ञात हो कि स्वामी सहजानंद सरस्वती का आंदोलन केवल जमींदारी उन्मूलन तक सीमित नहीं था, बल्कि किसानों को उनका हक दिलाने की लड़ाई थी। सबलपुर किसान संघर्ष समिति द्वारा उठाए गए मुद्दे (बाढ़, टोपोलैंड, मरीन ड्राइव और कॉरिडोर मुआवजा) यदि सरकार द्वारा अमलीजामा पहनाए जाते हैं, तो इससे न केवल सोनपुर बल्कि पूरे बिहार के किसानों और आम जनों के जीवन स्तर में क्रांतिकारी सुधार आएगा। सरकार को इन व्यावहारिक मांगों पर तुरंत सकारात्मक कदम उठाना चाहिए।

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