महोत्सव में बज्जिका भाषा व साहित्य के विकास पर जोर
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। विश्व बज्जिका महोत्सव में बज्जिका भाषा और साहित्य के विकास पर जोर देते हुए कहा गया कि वैशाली, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, चंपारण आदि में बोली जानेवाली बज्जिका भाषा में अब महाकाव्य भी लिखे जा रहे हैं।
वैशाली जिला के हद में बज्जिका मंदाकिनी रौंदी पोखर द्वारा 23 जनवरी को आयोजित विश्व बज्जिका महोत्सव का उद्घाटन पत्रकार सह साहित्यकार सुरेन्द्र मानपुरी, सेवानिवृत प्रोफेसर रणवीर कुमार राजन, बज्जिका साहित्य समाज के अध्यक्ष रामचंद्र कुशवाहा, डॉ हरिनारायण पांडेय, धर्म संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रमाशंकर शास्त्री आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
शिक्षाविद एवं हिंदी बज्जिका के समर्थ कवि कपिल देव सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस महोत्सव के प्रारंभ में बज्जिका बयार पत्रिका के तीसरे अंक का लोकार्पण किया गया। लोकार्पण के पश्चात साहित्यकार ज्वाला सांध्य पुष्प ने पत्रिका की समीक्षा की और बज्जिका के विकास के लिए रचनाकारों को आगे आने की अपील की। तत्पश्चात पत्रकार सुरेंद्र मानपुरी ने महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि लोक साहित्य समाज की आत्मा है।
ज्ञान का सरलीकरण ही लोकभाषा है, जिसका प्रमुख उदाहरण अवधि भाषा में लिखा गया रामचरित मानस है। मानस में तुलसी दास की विशेषता यह है कि प्रत्येक कांड की शुरुआत संस्कृत के श्लोकों से करते हैं और संस्कृत का ज्ञान जब जमीन पर उतरकर सौंदर्य और लालित्य की ओर बढ़ता है तो वह सरल, सुगम और सुबोध होकर लोक भाषा कहलाता है। इसलिए किसी भी लोकभाषा के साहित्यकार को मानस में तुलसी दास द्वारा किए गए प्रयोग से सबक लेना चाहिए और अपने भीतर वैसी ही काव्य शक्ति विकसित करनी चाहिए जो अवधि भाषा के मानस में है।

महोत्सव के मुख्य अतिथि डॉ रणवीर कुमार राजन ने बज्जिका भाषा और साहित्य के विकास पर संतोष जताया। साथ हीं कहा कि कभी यह भाषा गुमनाम थी, लेकिन अभी काव्य और महाकाव्य का लेखन हो रहा है। इसे और गति देने की जरूरत है। पंडित रमाकांत शास्त्री, रामचंद्र महतो कुशवाहा, डॉ हरिनारायण पांडेय आदि ने भी बज्जिका भाषा और साहित्य पर व्याख्यान दिए। अपने अध्यक्षीय संबोधन में शिक्षाविद कपिलदेव सिंह ने रचनाकारों से बज्जिका साहित्य में उच्च आदर्श प्रस्तुत करने का आग्रह किया।
प्रारंभ में महोत्सव के आयोजक मणिभूषण प्रसाद सिंह अकेला ने सभी अतिथि रचनाकारों और श्रोताओं का स्वागत किया। इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ रेणु शर्मा, डॉ हेमा सिंह, डॉ पूनम सिन्हा श्रेयसी, डॉ विद्या चौधरी आदि डेढ़ दर्जन से अधिक कवियों व् कवियित्रीयों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। संजय विजित्वर ने काव्य गोष्ठी का संचालन किया।
![]()













Leave a Reply