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हरिहरक्षेत्र की पावन धरती पर वसंतोत्सव एवं सरस्वती पूजा की धूम

होली गायन के साथ वसंतोत्सव का स्वागत, लगे अबीर, उड़े गुलाल

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। माघ शुक्ल पंचमी के अवसर पर 23 जनवरी को सारण जिला के हद में हरिहरक्षेत्र सोनपुर की पावन धरती पर वसंतोत्सव एवं सरस्वती पूजा की सर्वत्र धूम रही। क्षेत्र में जिधर देखे चौक-चौराहो, गली-मुहल्ले यहां तक कि विद्यालय परिसर में विद्या दायिनी सरस्वती पूजा की धूम रही।

इस अवसर पर हरिहर क्षेत्र सोनपुर में श्रीराम नाम संकीर्तन एवं होली गायन के साथ वसंतोत्सव का शुभारंभ किया गया। एक दूसरे को रहिवासियों ने अबीर लगाए और गुलाल उड़ाकर वातावरण को लाल कर दिया।vवसंतोत्सव के अवसर पर क्षेत्र के पहलेजा धाम शारदा मंदिर में भी देवी सरस्वती की पूजा विधि – विधान के साथ की गयी। कई सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों में छात्र – छात्राओं ने समवेत स्वरों में सरस्वती वंदना या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा का सस्वर पाठ किया।
ज्ञात हो कि, सोनपुर क्षेत्र में इस वर्ष 385 सरस्वती पूजा -मंडपों में आधिकारिक रूप से पूजा- अर्चना संपन्न हुई। इसके अलावा भी निजी तौर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने घरों में देवी सरस्वती के चित्रों व् प्रतिमाओं की पूजा – आराधना की।

सोनपुर के मही नदी किनारे संकट मोचन मंदिर परिसर, सबलपुर में श्रीभारती वेदविद्या गुरुकुलम में प्रबंधक डॉ आशुतोष कुमार के मार्गदर्शन में सरस्वती पूजा, आरती और प्रसाद वितरण हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। सबलपुर मध्यवर्ती पंचायत के सबलपुर बभनटोली स्थित संचेतना सरस्वती पूजा समिति के बैनर तले विद्या की देवी सरस्वती की प्राण प्रतिष्ठा की गयी।

इस दौरान यहां श्रीराम नाम संकीर्तन का आयोजन किया गया। संध्याकालीन बेला में होली गायन के माध्यम से वसंतोत्सव मनाया गया। गायकों की टोली में शामिल ग्रामीण कलाकारों ने एक दूसरे को अबीर लगाई और गुलाल से आकाश को लाल कर दिया। वसंतोत्सव पर सबलपुर के बभनटोली बड़ा शिव मंदिर परिसर में भी सरस्वती पूजा धूम -धाम से मनाया गया।

विसर्जन के दौरान डीजे पूर्ण रूप से बंद रहेगा, साथ ही बैंड और अश्लील गीतों पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. पूजा समितियों ने प्रशासनिक आदेश के आलोक में पूजा और शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी स्वयं ली है। विसर्जन के नाम पर किसी भी जातिगत या धार्मिक भावना को आहत करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, पूजा या विसर्जन के नाम पर किसी भी प्रकार का हुड़दंग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोजनों में सिर्फ शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक ही गीत बजाने की अनुमति दी गई है।

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