Advertisement

सूचना आयुक्त की नियुक्ति मामले को ले नेता प्रतिपक्ष से मिला हमर अधिकार मंच

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड में सूचना आयुक्त की नियुक्ति और झारखंड राज्य सूचना आयोग में यथाशीघ्र सुनवाई प्रारंभ करवाने को लेकर नेता प्रतिपक्ष सह भारतीय जनता पार्टी झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी से 10 जनवरी को हमर अधिकार मंच का 3 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मिला। मंच ने झारखंड के 16 जिलों के 91 प्रबुद्ध जनों द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन उन्हें सौंपा।

इस अवसर पर हमर अधिकार मंच ने नेता प्रतिपक्ष से मांग किया कि विधि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, समाजसेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता जनसंपर्क माध्यम में व्यापक ज्ञान और अनुभव रखने वाले समाज में प्रख्यात गैर-नौकरशाह को ही सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त करवाया जाय।

जानकारी के अनुसार हमर अधिकार मंच का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंच के अध्यक्ष दीपेश निराला की अध्यक्षता में झारखंड के नेता प्रतिपक्ष सह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी से मुलाकात कर झारखंड के 16 जिलों यथा गिरिडीह, पलामू, लातेहार, गढ़वा, धनबाद, दुमका, सरायकेला-खरसावां, लोहरदगा, पाकुड़, हजारीबाग, खूंटी, सिमडेगा, रांची, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम और गुमला के 91 प्रबुद्ध जनों द्वारा हस्ताक्षरित एक ज्ञापन सौंपा। सौंपे गये ज्ञापन me जल्द से जल्द झारखंड में सूचना आयुक्त की नियुक्ति करवाने और यथाशीघ्र झारखंड राज्य सूचना आयोग में सुनवाई प्रारंभ करवाने की मांग की, ताकि सूचना आयोग में लंबित पड़े 25000 से अधिक द्वितीय अपीलवाद और शिकायतवाद पर 5.5 वर्षों से अधिक समय से लंबित मामलों में सुनवाई शुरू हो सके।

नेता प्रतिपक्ष से भेंट में मंच द्वारा आग्रह किया गया कि सूचना आयुक्त के रूप में गैर-नौकरशाह जो विधि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, समाजसेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता जनसंपर्क माध्यम में व्यापक ज्ञान और अनुभव रखने वाले समाज में प्रख्यात की ही नियुक्ति की जाए और नौकरशाह को सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त नहीं करवाया जाय। क्योंकि, वैसे जन सूचना पदाधिकारी और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी जो सूचनाओं को रोकते हैं और जिनके विरुद्ध सूचना आयोग में द्वितीय अपील और शिकायतवाद दर्ज कराया जाता है, उनका पूर्व संबंध सेवाकाल में सेवानिवृत्त नौकरशाह से हो सकता है या उनके अधीनस्थ ऐसे पदाधिकारी सेवाकाल में काम किए हुए हो सकते हैं।

कहा गया कि ऐसे आयुक्त न्याय करते समय और सूचना दिलवाते समय तटस्थ और निष्पक्ष रहें, तो बेहतर रूप से सूचना की मांग करने वाले आवेदकों को बेहतर रूप से सूचना दिलवाई जा सकती है। मंच के अध्यक्ष दीपेश निराला ने कहा कि सरकार ने काफी समय से झारखंड में नेता प्रतिपक्ष नहीं होने की वजह से सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने की बात कही थी, लेकिन विगत मार्च 2025 से झारखंड में लगातार नेता प्रतिपक्ष कार्यरत हैं, फिर भी सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है। नेता प्रतिपक्ष से भेंट में मंच का तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष दीपेश निराला, उपाध्यक्ष रेणुका तिवारी और महासचिव उमाशंकर सिंह शामिल थे।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *