एस. पी. सक्सेना/बोकारो। देश के महारत्न कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड की अनुशंगी इकाई सीसीएल में सरकारी राशि का दुरुपयोग किस प्रकार किया जा सकता है, इसका बेहतर उदाहरण बोकारो जिला के हद में सीसीएल के कथारा क्षेत्र में खुली आंखों देखा जा सकता है। यह बात अब क्षेत्र के आम व खास के बीच चर्चा का विषय बन गया है। जबकि सीसीएल का उच्च प्रबंधन मामले में अबतक बेखबर है।
बताया जाता है कि सीसीएल कथारा क्षेत्र के असैनिक विभाग कंपनी नियम की आड़ में गैर जरूरी कार्यों को खास तवज्जो दे रही है, जबकि जरूरी कार्य के प्रति विभाग की लापरवाही संवेदकों को लुट की खुली छूट देना है। शायद इसमें विभागीय अधिकारी एवं कर्मियों का व्यक्तिगत हित समाहित होता है, अन्यथा ऐसा करने की जुर्रत कोई भी नहीं कर पाता।
ध्यान देने योग्य है कि कथारा क्षेत्र के जरंगडीह खुली खदान दामोदर नदी तट पर ₹ एक करोड़ से अधिक का कार्य योजना बनाकर नदी जल कटाव को रोकने के लिए महाकाल नामक कंपनी को कार्यादेश दिया गया था। विभागीय सूत्र बताते हैं कि उक्त कंपनी द्वारा थुक पाॅलिस किए जाने की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा हस्तक्षेप का प्रयास किया गया। इसे देखते हुए संबंधित ठेका कंपनी काम करने से मुकर गया। इसके बाद विभाग के एक चहेते संवेदक ने उक्त कार्य को अपने जीम्मे करने का आश्वासन दिया। सूत्र बताते हैं कि एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा। इसके बाद उक्त संवेदक द्वारा भी इस कार्य में पुनः थुक पाॅलिस शुरू कर दिया गया है, जो जांच का विषय है।

इस बाबत पूछे जाने पर बीते 5 जनवरी को संबंधित कार्य का अभियंता सहायक असैनिक ने बताया कि यह कार्य महाकाल कंपनी द्वारा कराया जा रहा है। कार्य में गुणवत्ता की कमी को अभियंता सहायक भी स्वीकार करते हैं। वहीं विभागाध्यक्ष असैनिक संजय सिंह बताते हैं कि महाकाल कंपनी द्वारा गुणवत्ता शिकायत को लेकर कार्य करने में आनाकानी के बाद स्थानीय एक ठेकेदार को काम सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि तटबंधों पर कटाव रोकने को लेकर कार्य की गुणवत्ता में किसी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, बावजूद इसके यह खुली आंखों देखा जा सकता है कि जिस दर्जे की सामग्री की मिलावट किया जा रहा है, क्या इससे कटाव रोकना संभव होगा?
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