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साथ लाख नगदी, 2 किलो सोना व् 6 किलो चांदी उठा ले जाने का पुलिस पर आरोप

डीआईजी तिरहुत रेंज ने कहा वर्दी को शर्मशार करने की घटना

गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। वैशाली जिला के हद में लालगंज के थानाध्यक्ष संतोष कुमार और दरोगा सुमन झा के विरुद्ध एक छापामारी के दौरान बरामद सोना, चांदी और कीमती सामान को जप्ती सूची में नहीं दिखाने का आरोप लगा है।

घटना के संबंध में बताया गया है कि लालगंज थाना प्रभारी संतोष कुमार को बीते 30 दिसंबर को गुप्त सूचना मिली थी कि थाना क्षेत्र के बिलनपुर गांव में रामप्रीत सहनी के घर चोरी का काफी सामान रखा गया है। आरोपी उसका बंटवारा कर रहे हैं। सूचना की जांच और वरीय अधिकारियों के निर्देश के बाद थानाध्यक्ष के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई गई। इसके बाद पुलिस बल के साथ बिलनपुर गांव स्थित रामप्रीत सहनी के घर पर छापेमारी की गई।

बताया जाता है कि पुलिस वाहन को देखते ही पांच से छह संदिग्ध अपराधी मौके से फरार हो गए, हालांकि पुलिस उन्हें पकड़ने में सफल नहीं हो सकी। छापेमारी के दौरान पुलिस ने सहनी की पत्नी को गिरफ्तार किया और उसे जेल भेज दिया। पूछताछ में उसने बताया कि उसका पति अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर लालगंज थाना क्षेत्र के गंज इलाके में लगातार चोरी और घर में घुसकर चोरी की घटनाओं को अंजाम देता रहा है। छापामारी के दौरान सहनी के घर से फूल, पीतल के बर्तन और अन्य कीमती सामान मिले, जिसे जप्त कर पुलिस थाने पर ले आई। पुलिस के अनुसार, हाल ही में लालगंज इलाके में हुई चोरी के मामले में गृहस्वामी द्वारा चोरी गए सामान की पहचान कर ली गई है।

इधर, इस मामले में आरोपी रामप्रीत सहनी के रिश्तेदार गेना लाल सहनी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने चोरी का आरोप लगाकर घर में छापेमारी की और वहां से 50 से 60 लाख रुपये नकद, लगभग 2 किलो सोना और 6 किलो चांदी उठा ले गई। आरोप है कि उपरोक्त सारा सामान जब्ती सूची में नहीं दिखाया गया है। दावा है कि गांव के कई रहिवासियों ने पुलिस को सामान ले जाते देखा था।

इस मामले की जानकारी तिरहुत रेंज के डीआईजी जयकांत को मिलने पर उन्होंने घटना को गंभीरता से लेते हुए गोपनीय ढंग से जांच कराई है और जांच में लालगंज थाना प्रभारी और दरोगा को छापामारी के दौरान अनियमितता, छापामारी के दौरान बरामद सोने, चांदी के गहने को जप्ती सूची में नहीं दिखाने को लेकर दोषी पाया है। डीआईजी ने उपरोक्त दोनों पुलिस पदाधिकारी को निलंबित करते हुए आरक्षी अधीक्षक वैशाली को घटना की पूरी जांच करने का निर्देश दिया। जिसके बाद थानाध्यक्ष और दरोगा के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। डीआईजी ने 4 जनवरी को मुजफ्फरपुर में इन पुलिस पदाधिकारी के कार्यों को पुलिस की वर्दी को कलंकित करने वाला बताया है।

बताया जाता है कि निलंबित दरोगा सुमन झा जब वर्ष 2004 में मुजफ्फरपुर में कार्यरत थे, तब निगरानी ने इन्हें 11000 रुपए घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उक्त मामला अभी निगरानी कोर्ट में लंबित है। लालगंज थाना की उपरोक्त घटना जिले और देश में चर्चित हो रही है। रहिवासियों का कहना है कि जब पुलिस ही चोरी करने लगे, तो चोर को कौन पकड़ेगा?

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