प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। घोषित झारखंड आंदोलनकारी दिवस संविधान सभा के सदस्य और झारखंड आंदोलन के संस्थापक मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और सावित्री बाई फुले की जयंती पर 3 जनवरी को झारखंड आंदोलनकारियों ने उनके तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया।
झारखंड आंदोलनकारीयों को मान, सम्मान और पेंशन की गारंटी देना होगा, सभी झारखंड आंदोलनकारियों के आश्रितों को सीधी नियुक्ति देना होगा, आंदोलनकारियों के लिए गुरुजी मेडिकल कार्ड जारी करो, शहीदों के सपनों का झारखंड के लिए संघर्ष तेज करो और जय झारखंड के ज़ोरदार नारों के साथ बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड के चलकरी दक्षिणी पंचायत के बाघा टोंगरी स्थित झारखंड आंदोलनकारी स्मारक स्थल पर आंदोलनकारी दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां बड़ी संख्या में झारखंड आंदोलनकारी शामिल हुए।
इस अवसर पर झारखंड आंदोलनकारीयों ने संविधान सभा के सदस्य और झारखंड आंदोलन के संस्थापक मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की जयंती को झारखंड आंदोदनकारी दिवस के रूप में घोषित करने की मांग किया। झारखंड आंदोलनकारी स्मारक स्थल पर आयोजित झारखंड दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चिह्नित आंदोलनकारी और भाकपा माले नेता भुवनेश्वर केवट ने कहा कि आजादी के आंदोलन की तरह ही झारखंड 80 वर्षों के लंबे आंदोलन के बाद झारखंड अलग राज्य हासिल हुआ है। कहा कि झारखंड उपहार में नहीं, बल्कि लंबे संघर्षों और शहादत की देन है।
झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में जेल नहीं जाने वाले ऐसे आंदोलनकारियों को जिनके ऊपर मुकदमें हुए हैं। जो लंबे समय जंगलों में अज्ञातवास रहकर आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। वैसे आंदोलनकारियों को सम्मान, पेंशन की राशि का लाभ दिया जाए। आंदोलनकारियों और शहीदों के आश्रितों को क्षैतिज आरक्षण के बजाय सीधी नियुक्ति की गारंटी किया जाए। उन्होने कहा कि झारखंड के आंदोलनकारियों के भावनाओं का राज्य और केंद्र की सरकार ख्याल करें, वरना झारखंड के जंगल, जमीन और कोयला लोहा समेत अन्य खनिजों की अंधाधुंध लूट के खिलाफ फिर से नाकेबंदी आंदोलन की शुरुआत होगी।
अशोक मंडल ने कहा कि झारखंड के शहीदों को आज भी उचित सम्मान नहीं दिया जा रहा है। मारंग गोमके तथा सावित्री बाई फुले की जीवनी और संघर्ष को बच्चों के पाठ्य कार्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। झारखंड आंदोलनकारी नेता पंचानन मंडल ने कहा कि आज फिर झारखंड आंदोलन की तरह ही झारखंड को बचाने का आंदोलन तेज करना होगा। अध्यक्षता झारखंड आंदोलनकारी इंद्रदेव सिंह ने किया।
सभा को पदुम महतो, बैजनाथ गौराई, राज केवट, ज्ञान सिंह, दुर्गा सिंह, रामदास हांसदा, चुन्नीलाल केवट, ठाकुर लाल मांझी, मकसूद आलम, कामेश्वर गिरि, कुतुबुद्दीन, चुनीलाल रजवार, भूषण केवट, लखन लाल नायक, गणपत सिंह, खूबलाल नायक, नरेश गिरि, कामेश्वर नायक, रूपलाल केवट, कमल मांझी आदी मुख्य रूप से उपस्थित थे।
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