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कहीं सिमटे हुए चेहरे, तो कहीं बिखरे चेहरे नज़र आते हैं——

देश के चर्चित कवि एवं शायरों ने किया अपनी रचनाओं का पाठ

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला के मुख्य सांस्कृतिक मंच पर आयोजित साहित्योत्सव के दूसरे दिन 27 नवंबर को मंच से देश के चर्चित कवि एवं शायरों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

दिवाकालीन सत्र में साहित्य का साझा पर्व कार्यक्रम के तहत समय के स्वर गजल पाठ का आयोजन किया गया। जिसमें देश के जाने माने कई कवि – कवित्रियों ने अपनी रचनाओं का सस्वर पाठ किया। बिहार के चर्चित कवि अविनाश बंधु के संचालन में आयोजित साहित्योत्सव में सभी कवि एवं शायरों ने अपनी प्रस्तुति से पंडाल में उपस्थित दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।

इससे पूर्व सारण के जिलाधिकारी अमन समीर ने सोनपुर साहित्योसव के दूसरे दिन के सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। जिलाधिकारी ने भी सभी आगन्तुक दर्शकों व श्रोताओं को संबोधित किया। साहित्योत्सव में सबसे पहले सोनपुर रहिवासी वरिष्ठ गजलकार सीताराम सिंह ने अपना गजल पाठ किया। इसके बाद कवि संजय कुमार कुंदन ने अपनी गजल पढ़ी। इसके अलावे नसीम अख्तर, अनिरुद्ध सिन्हा, सुप्रसिद्ध कवियित्री आराधना प्रसाद ने बारी बारी से अपनी रचनाओं का सस्वर पाठ किया।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में जब युवा दिलों की धड़कन सुप्रसिद्ध कवि एवं शायर समीर परिमल ने गजल कहीं सिमटे हुए चेहरे तो कहीं बिखरे हुए चेहरे नज़र आते हैं, इस सैलाब में सूखे हुए चेहरे चला आया हूं अनजानों की बस्ती में, मगर परिमल यहां चेहरों के पीछे हैं मेरे देखे हुए चेहरे—- का सस्वर पाठ किया तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
इस मौके पर अन्य कवियों यथा अभिषेक कुमार सिंह, रवि किशन, विकास राज, अक्स समस्तीपुरी, अंकित मौर्य, अविनाश भारती आदि शायरों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को काफी प्रभावित किया। अंत में जिला प्रशासन सारण की ओर से सभी कवि एवं शायरों को सोनपुर मेला का प्रतीक -चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

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