एन. के. सिंह/फुसरो (बोकारो)। केंद्र सरकार द्वारा कोयला उद्योग में चार श्रम कानून लागु करने के विरोध में 26 नवंबर को केंद्रीय श्रम संगठन के नेताओं द्वारा जोरदार प्रदर्शन किया गया। उक्त प्रदर्शन बोकारो जिला के हद में करगली गेट स्थित महात्मा गांधी चौक पर किया गया।
प्रदर्शन कार्यक्रम की अध्यक्षता एटक नेता चन्द्रशेखर झा ने किया।श्रमिक विरोधी नये लेबर कोड लागू किये जाने के विरोध में सैकड़ो श्रमिक एकत्रित होकर नए लेबर कोड का पुरजोर विरोध किया और सरकार के खिलाफ नए कानून वापस से संबंधित नारे लगाए। सभी वर्ग के मजदूरों ने इस नए कानून का जोरदार विरोध किया और सरकार तक यह खबर पहुंचाने का प्रयास किया कि हमें नए चार श्रम कानून मंजूर नहीं है।
प्रदर्शन सभा को संबोधित करते हुए इंटक नेता श्यामल कुमार सरकार ने कहा कि केंद्र सरकार ने पांच वर्ष पहले ही 29 लेवर कोड को 4 लेवर कोड में परिवर्तन कर संसद में पास किया था, जिसका विरोध पूरे देश के मजदूरों ने धरना, प्रदर्शन और बंदी कर दिखा चुका है। परंतु आज मोदीजी की सरकार ने इसे लागू करने का फरमान जारी की है, जिससे पूरे देश के मजदूरों में आक्रोश व्याप्त है।
ज्ञात हो कि इस कानून के लागू होने से सरकारी नौकरी तथा गैर सरकारी नौकरी करने वाले मजदूरों की अधिकार में कटौती होगी और प्रबंधन निरंकुश होकर मजदूरों के अधिकारों में कटौती करेगी। वेतन, बोनस, काम अवधि, कल्याणकारी योजना में कटौती होगी। इसलिए मजदूरों को आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं है। श्रमिक नेताओं के अनुसार सरकार बड़े पूंजीपतियों के हाथ में कोयला उद्योग को देने का फैसला लिया है जो देश हित में नहीं है।
एटक नेता लखन लाल महतो ने कहा कि सरकार यदि जबरदस्ती से इस कानून को लागू करने में अड़ा रहता है तो श्रमिक वर्ग हर तरह के आंदोलन करने के लिए तैयार है। कहा कि आज देश के हर वर्ग के मजदूर सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार इस नए चार श्रम संहिताओं को वापस ले। मौके पर सीएमयू के आर उनेश, जमसं के मोहम्मद खुर्शीद, आरकेएमयू के महारुद्र सिंह और मजदूर नेता सुजीत घोष व विकास सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के द्वारा 29 श्रम कानूनों को 4 लेबर कोड में बनाकर इसे देश भर में लागू क़रने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए।
कहा कि सरकार के द्वारा मिडिया के माध्यम से इन चार लेबर कोड की सिर्फ खूबियां गिनाई जा रही है। इस कोड में श्रमिक वर्ग को होने वाले नुकसान नहीं बताया जा रहा है, जबकि बनाये गए इन चार कानूनों में अब मजदूरों की नौकरी सुरक्षित नहीं रही। कहा कि 300 तक के कर्मचारियों वाली कम्पनिया बिना सरकार के अनुमति के छंटनी, बंदी या ले ऑफ़ कर सकती है। हड़ताल में जाने से 14 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य फिर 60 दिन तक मनमाने ढंग से हड़ताल रोक सकती है, यानि हड़ताल करना मुश्किल। वक्ताओं ने कहा कि ये चारों संहितायें मजदूर विरोधी और पूंजीपतियों के पक्ष में बनाये गए है।
इस अवसर पर हरेंद्र प्रसाद सिंह, जितेंद्र दूबे, सुबोध सिंह पवार, शिवनंदन चौहान, राहुल कुमार, दिगंबर महतो, मुरारी सिंह, राजेश्वर सिंह, राजू भुखिया, राम लाल यादव, हरिमोहन सिंह, अरुणजय सिंह, संतोष कुमार, अशोक अग्रवाल, गौतम सेन गुप्ता, आलोक अकेला, गणेश महतो, जयनाथ तांती, एन के गुप्ता, विनोद शर्मा, किशोरी शर्मा, प्रताप सिंह, शैलेंद्र कुमार, मोहम्मद हसनैन, जय बहादुर, मुरारी राम, विजय शर्मा, राजेश नायक, सुब्रतो गांगुली आदि मुख्य रूप से मौजूद थे।
एक अन्य जानकारी के अनुसार नॉर्दर्न कोलफीड्स लिमिटेड (एनसीएल) की संयुक्त केंद्रीय श्रमिक संगठन गेवरा क्षेत्र द्वारा नए चार लेबर संहिता लागू किए जाने के विरोध में 26 नवंबर प्रदर्शन किया गया।
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