Advertisement

स्त्री हो चाहे पुरुष स्वच्छंदता अनुशासनहीनता को दर्शाता है

शुर्पणखा प्रकरण से रामायण मंचन के पांचवें दिन की शुरुआत

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला में 26 नवंबर के संध्याकालीन बेला में सांस्कृतिक संगम की प्रस्तुति रामायण मंचन के पांचवें दिन की शुरुआत शूर्पणखा का नाक काटे जाने के प्रकरण से की गयी।

इस संवाद के साथ कि नारी स्वतंत्र होनी चाहिए स्वच्छंद नहीं। स्त्री हो चाहे पुरुष स्वच्छंदता उसके अनुशासनहीनता को दर्शाता है। और यही अनुशासनहीनता एक दिन उसके अपमान का कारण बनता है। संयम और अनुशासन समाज, परिवार एवं स्वयं के व्यक्तित्व को एक ऊंचाई प्रदान करता है। इसी कड़ी में शुर्पणका के अभिमान को पोषित करने वाले अभिमानी खर -दुषण अन्ततः राम के हाथों मारे जाते हैं।

इसी कड़ी में शूर्पणखा अपने बड़े भाई रावण से राम के प्रति अपने अशोभनीय हरकतें और अश्लील संवादों को ना बता कर बल्कि झूठा आरोप लगाते हुए राम द्वारा खुद पर किए गए अत्याचार को बढ़ा चढ़ा कर बताती है। मद में चूर रावण अपने विवेक से काम न लेकर अपने अहंकार में चूर क्रोधित हो कर राम को अपना शत्रु मान बैठता है।

संसार में कोई भी व्यक्ति जब अभिमानी हो कर मद में चूर हो जाता तो सबसे पहले उसका विवेक मर जाता है। रामधारी सिंह दिनकर ने रश्मिरथी में लिखा है कि जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मर जाता है। यही स्थिति रावण की भी होती है। उसके सारे ज्ञान, विद्या, समझ उसका साथ छोड़ देते हैं। भगवान शिव का परम भक्त रावण शिव के अराध्य श्रीराम से शत्रुता कर बैठता है। और अंततः अपने पतन का मार्ग स्वयं ढूंढ लेता है। आज मंच पर इन्हीं सारे प्रसंगों में रावण- मारीच संवाद, सीता हरण, राम – जटायु संवाद और अंत में भक्ति की पराकाष्ठा नवधा भक्ति स्वरुपा शबरी राम को अपनी कुटिया तक खींच लाती है। शबरी राम का दर्शन कर स्वयं का जीवन धन्य कर लेती है।

 

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *