मनमोहक रूप धर बच्चों ने दिया प्रकृति-संरक्षण, अच्छी सेहत व् राष्ट्रीय एकता का संदेश
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने के साथ-साथ उनमें कलात्मक व रचनात्मक गुणों के विकास को लेकर दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो में फैन्सी ड्रेस प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यालय की प्राइमरी इकाई में आयोजित तीन-दिवसीय इस प्रतियोगिता का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया।
प्रतियोगिता में शामिल नन्हे छात्र-छात्राओं की मनोहारी वेशभूषा, उनकी सुंदर रूप-सज्जा, मासूम अदाकारी और तोतली जुबान में उनके संवाद-प्रेषण ने खूब लुभाया। विद्यालय के लगभग साढे चार सौ बच्चों ने अलग-अलग समूहों में विभिन्न श्रेणियों के तहत अपनी प्रस्तुतियां देकर सबकी भरपूर सराहना बटोरीं। अलग-अलग स्वरूपों और पात्रों में ढलकर अपनी प्रस्तुतियों के जरिए नन्हे विद्यार्थियों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और अनेकता में एकता, प्रकृति एवं जीव-जंतुओं के संरक्षण तथा अच्छी सेहत का सुंदर संदेश दिया।
कार्यक्रम में प्रेप कक्षा की कुछ छात्राएं परियों की कहानियां लेकर आईं, तो कुछ बच्चे चींटी, मकड़ी सहित अन्य कीड़े-मकोड़े एवं रेंगने वाले जंतुओं का वेश धर मंच पर उतरे तथा सभी जीव-जंतुओं के संरक्षण का संदेश दिया। वहीं, कुछ प्रतिभागियों ने घर के साजो-सामान के रूप में खुद को प्रस्तुत कर सबकी महत्ता समझाई। नर्सरी कक्षा के प्रतिभागियों ने अलग-अलग कार्टून कैरेक्टर को दर्शाया। फल-सब्जियों के वेश में अच्छी सेहत के लिए उनकी अहमियत समझाई और पशुओं के स्वरूप में पशु-संरक्षण का संदेश दिया।
इसी प्रकार, पहली कक्षा के विद्यार्थी भगवान शिव, विष्णु, जगन्नाथ, बालाजी, महाकाली, देवी दुर्गा, सरस्वती, अर्द्धनारीश्वर सहित अन्य देवी-देवताओं के वेश में पहुंचे तथा आध्यात्मिक ऊर्जा को प्रदर्शित किया। कुछ प्रतिभागियों ने भारत के विभिन्न राज्यों की वेशभूषा के जरिए वहां की संस्कृति को दर्शाया। इसके अलावा, विभिन्न खाद्य-वस्तुओं के रूप में उनकी खासियत बताई। आकर्षक परिधानों में बच्चों की अप्रतिम साज-सज्जा, उनकी और उनके अभिभावकों की मेहनत बयां कर रही थी।
मौके पर बच्चों के अभिभावक भी मौजूद रहे। प्रतियोगिता में समूहवार प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत कर उन्हें प्रोत्साहित किया गया।
विद्यालय के प्राचार्य डॉ ए. एस. गंगवार ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऐसी गतिविधियां नन्हे शिक्षार्थियों में आत्मविश्वास, संचार कौशल और रचनात्मक सोच विकसित करने में अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसी स्पर्धाओं में अवश्य भाग लेना चाहिए। हार-जीत से ज्यादा प्रतिभागिता महत्वपूर्ण है।
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