बाल अधिकारों के पैरवीकार थे पंडित नेहरू-सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल कथारा में 14 नवंबर को पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती पर बाल दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। उपस्थित सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी जोन आई सह प्राचार्य, तमाम शिक्षक, शिक्षिका, शिक्षकेत्तर कर्मी तथा स्कूली छात्र-छात्राओं ने अपने प्रिय चाचा नेहरू को याद किया त्त उनके चित्र पर पुष्प अर्पित की।
जानकारी देते हुए डीएवी कथारा के शिक्षक रंजीत कुमार सिंह तथा बी के दसौंधी ने कहा कि विद्यालय परिवार के लिए आज का दिन विशेष था। प्रार्थना सभा की शुरुआत शिक्षकों द्वारा प्रार्थना से की गई। तत्पश्चात सभी शिक्षक- शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों ने पंडित नेहरू को पुष्पांजलि अर्पित की।
शिक्षक द्वय ने बताया कि बाल दिवस के अवसर पर प्रातः कालीन प्रार्थना सभा की सभी गतिविधियां शिक्षक- शिक्षिकाओं द्वारा ही संपादित की गई। छात्र प्रतिज्ञा, विद्यालय के वरीय शिक्षक असित कुमार गोस्वामी ने प्रस्तुत किया।विचार शिक्षिका सुमन कुमारी ने, कविता शिक्षक सुरजीत कुमार एवं चंदन झा ने प्रस्तुत किया। वरीय शिक्षक पंकज कुमार द्वारा मजेदार समाचार प्रस्तुत किए गए, जिसे सुनकर बच्चे लोटपोट हो गए। मजेदार रोचक व्याख्यान शिक्षिका वीणा कुमारी एवं रंजीता पांडेय द्वारा प्रस्तुत किया गया।शिक्षिका मधु मल्लिका उपाध्याय द्वारा गाए गीत चंदा चमके चम-चम ने उपस्थित जनों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
बताया गया कि उपरोक्त गतिविधियों के पश्चात विद्यालय के प्राचार्य सह झारखंड जोन -आई के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी डॉक्टर जी. एन. खान ने प्रार्थना सभा को संबोधित किया। उन्होंने शिक्षकों के इस प्रयास की सराहना की एवं कहा कि बाल दिवस का इससे बेहतरीन तोहफा और कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री व् बच्चों के प्रिय पंडित जवाहरलाल नेहरू के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंडित नेहरू बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय थे।
जब भी वे बच्चों को देखते उनके साथ स्वयं भी बच्चे बन जाते। वे बाल अधिकारों के प्रणेता भी थे। उनका स्वप्न था कि भारत का कोई भी बच्चा अपने अधिकारों से वंचित न रहे। हर बच्चे को वो सारी सुविधा मिले जिनको प्राप्त कर वह भविष्य में एक सफल इंसान बन सके। उनका कहना भी था में आज के बच्चे कल का भारत बनाएंगे। उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू ने एक विकसित भारत का स्वप्न देखा था और इसे साकार करने के लिए उन्होंने देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया एवं’ गुटनिरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत भी की। उन्होंने लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी मूल्य पर आधारित भारत की नींव रखी।
वे चाहते थे कि भारत का हर बच्चा इन नीतियों का अनुसरण करें एवं आगे चलकर देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। प्राचार्य ने विद्यार्थियों से यह अपेक्षा की कि वे पंडित नेहरू के व्यक्तित्व से शिक्षा ग्रहण कर उनका आदर्श अपने व्यवहार, व्यक्तित्व में उतारें। इस अवसर पर सभी शिक्षक शिक्षिका एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने पं. नेहरू के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एक बनने तथा नेक बनने की शपथ ली।
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